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Patalkot: वर्ल्ड बुक में शामिल होने के बाद बढ़ी उम्मीद, ये मिले बन जाए बात

वर्ष 2019 में सरकार ने सौंपा था जैव विविधता बोर्ड को जिम्मा, निष्क्रियता से क्षेत्र को नहीं मिला लाभ, मेडिसिन प्लांट लगे तो बढ़ेगी भारियाओं की आय

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छिंदवाड़ा। विश्व विरासत स्थल पातालकोट में जैव विविधता संरक्षण के प्रयास चार साल बाद भी नहीं हो सके हैं। इससे इस क्षेत्र की जड़ी-बूटियां सीमित दायरे में सिमट गई हैं और उन्हें रिकॉर्ड में नहीं लाया जा सका है। नए मेडिसिन प्लांट को लगाने की पहल भी नहीं की जा रही है।
हाल ही में स्वीट्जरलैण्ड और दिल्ली से आए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकारियों ने पातालकोट पहुंचकर इसकी पहचान विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित की। वे इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता समेत अन्य विशेषताओं के मुरीद हो गए और इसे जैव विविधता संरक्षण की संभावनाओं का क्षेत्र बताया।
इससे इस क्षेत्र की उपयोगिता पर पूरे जिले का ध्यान पुन: गया है। लोग कह रहे हैं कि शिवराज सरकार की विकास यात्रा के समय इस क्षेत्र की जैव विविधता संरक्षण की कार्ययोजना बने तो नए मेडिसिन प्लांट लगाए जा सकते हैं। इसके साथ ही भारिया संस्कृति को सुरक्षित किया जा सकता है। इसके साथ ही रहवासियों की आय में वृद्धि की जा सकती है।


यह है जैवविविधता स्थल की विशेषताएं
राज्य शासन की ओर से बीती 10 जनवरी 2019 के राजपत्र में पातालकोट को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया गया था। पातालकोट पूर्व एवं पश्चिम वन मंडल के अधीन संरक्षित वन क्षेत्र 8367.49 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह स्थल 1700 फीट गहरी घाटी तथा छह मिलियन वर्ष की अनुमानित आयु वाला पारिस्थितिकी एवं दुर्लभ वनस्पति तथा प्राणियों वाला क्षेत्र है। इसमें ब्रायोफा इट्स एवं टेरिडोफ गइटस भी है। भारिया को जंगली पेड़ पौधे एवं जड़ी बूटियों का अनोखा पारंपरिक ज्ञान है, जिसका उपयोग वे औषधियां प्रभावी बनाने करते हैं। राज्य शासन ने राज्य जैव विविधता बोर्ड को इसके विकास का जिम्मा सौंपी थी। इस पर आज तक काम नहीं हो सका है।


इनका कहना है
प्रदेश में वर्ष 2019 में 26 जैव विविधता विरासत स्थल एवं प्रजाति चिन्हित की गई थी। इनमें छिंदवाड़ा जिले की तीन विरासत एक पातालकोट, दूसरा सागौन, शाल ट्रांजेक्शन जोन सीता डोंगरी देलाखारी और ग्वालो नस्ल क्षेत्र छिंदवाड़ा शामिल है। पातालकोट में जैव विविधता संरक्षण की कार्ययोजना और उस पर काम करने की आवश्यकता है। इससे पातालकोट की जड़ी-बूटियां संरक्षित होंगी।
-रविन्द्र सिंह, वृक्षमित्र

पातालकोट क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण के लिए औषधि प्लांट लगाए जाने की आवश्यकता है। इस पर विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
-ईश्वर जरांडे, डीएफओ पश्चिम वनमण्डल