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EDUCATION : पीएचडी प्रवेश के नियम बदले, जानें नए रूल

गलत उत्तर देने पर होगी माइनस मार्किंग

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सुनिए-सुनिए जरुरी सूचना ! डीएलएड की योग्यताएं प्राप्त करने 15 तक शिक्षकों को यह काम करना होगा अनिवार्य

छिंदवाड़ा/नागपुर. जो युवा पीएचडी करने का मन बना रहे हैं, उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, नागपुर यूनिवर्सिटी ने अपने पीएचडी प्रवेश परीक्षा (पेट) के नियमों में बदलाव किया है। जिसमें इस परीक्षा में प्रत्येक गलत उत्तर पर आधा नंबर कटेगा। पूर्व में दो गलत उत्तरों पर आधा नंबर काटा जाता था।
जानकारी के अनुसार विवि ने जानबूझ कर पेट परीक्षा के नियमों को सख्त किया है ताकि विश्वविद्यालय समिति बेहतर गुणवत्ता वाली पीएचडी डिग्री प्रदान करे। प्रवेश परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग के साथ ही पीएचडी प्रक्रिया में और भी बदलाव होंगे। अब तक पीएचडी शोध प्रबंध पूरा होने के बाद विवि द्वारा तय किए गए तीन परीक्षकों द्वारा उसकी जांच की जाती थी। इसमें से दो लोग प्रबंध पास करते तो प्रबंध स्वीकार कर लिया जाता, लेकिन अब से ऐसा नहीं होगा। अब तीनों परीक्षक प्रबंध को पास करेंगे तो ही प्रबंध स्वीकार किया जाएगा।

इसी तरह इस बार विवि ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी एक सुविधा शुरू की है। अब तक ऑनलाइन पद्धति से यह परीक्षा दो चरणों (पेट-1 और पेट-2) में होती थी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह परीक्षा ऑफलाइन मोड में भी ली जाएगी।

इधर, यूनिवर्सिटी ने पूर्व कुलसचिव अशोक गोमासे के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। नागपुर खंडपीठ को यह जानकारी दी। विवि ने अपने हलफनामे में कोर्ट को बताया कि उन्होंने गोमासे को उनके खिलाफ चार्जशीट भी दे दी है। नागपुर खंडपीठ के आदेश के बाद यह जांच शुरू की गई है। हाईकोर्ट में उमेश बोरकर ने याचिका दायर कर सेंट्रल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मॉस कम्युनिकेशन के संचालक सुनील मिश्रा पर छात्रवृत्ति में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता उमेश बोरकर की दलील है कि विद्यापीठ अधिनियम के अनुसार शैक्षणिक शुल्क संबंधी आदेश जारी करने का अधिकार विद्यापीठ व्यवस्थापन परिषद को होता है। 5 दिसंबर 2013 को मिश्रा ने अवैध तरीके से विद्यापीठ के तत्कालीन कुलसचिव अशोक गोमासे से शुल्क वृद्धि का बनावटी पत्र तैयार करवाया और पिछड़ा वर्ग श्रेणी के विद्यार्थियों की फीस के रूप में समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति वसूल की। इस मामले में कॉलेज पर 59 लाख रुपए की वसूली भी निकाली गई है।