
पोआमा बांस शिल्प सेंटर के दुर्दिन होंगे दूर,पोआमा बांस शिल्प सेंटर के दुर्दिन होंगे दूर,पोआमा बांस शिल्प सेंटर के दुर्दिन होंगे दूर
छिंदवाड़ा. बांस शिल्पियों को रोजगार की दृष्टि से पोआमा में स्थापित बांस शिल्प सुविधा सेंटर के दुर्दिन अब दूर हो जाएंगे। इसका संचालन दो माह में ही शुरू हो जाएगा। नए डीएफओ ने आते ही इसका बिजली कनेक्शन कर दिया और धूल खा रही मशीनें भी स्थापित करा दी है। अब शिल्पियों की ट्रेनिंग पर ध्यान फोकस किया गया है।
यहां बता दें कि वर्ष 2018-19 में राज्य बांस मिशन की ओर से छिंदवाड़ा रेंज के अधीन भरतादेव में बम्बू ट्रीटमेंट एवं सीजनिंग, शिल्प और बांस फर्नीचर्स सेंटर की स्वीकृति दी गई थी। उसके बाद स्थानीय स्तर पर इस स्थल को बदलकर पोआमा कर दिया गया। करीब तीन करोड़ रुपए की लागत के इस प्रोजेक्ट में सुविधा सेंंटर निर्माण से लेकर मशीन तक डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए गए। फिर भी इस सेंटर के निर्माण को पूरा नहीं किया जा सका। इसके चलते पिछले चार साल से इस सेंटर गुमनामी के अंधेरे में रहा। सेंटर की औपचारिक शुरुआत भी नहीं हो सकी।
हाल ही में पूर्व वनमण्डल में डीएफओ ब्रजेन्द्र श्रीवास्तव ने कार्यभार संभाला तो उन्होंने धूल खा रहे इस सेंटर के बारे में रुचि ली। वे बालाघाट के बैहर बांस शिल्प सेंटर का संचालन कर चुके हैं। इसके चलते पोआमा सेंटर का बिजली कनेक्शन करवाया। साथ ही मशीनें स्थापित करना शुरू करवाया। वे दो माह में सेंटर को शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
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बांस से बने फर्नीचर से लेकर ज्वेलरी तक
इस सेंटर के शुरू हो जाने से शहरवासियों को बांस से बने फर्नीचर सोफा, कुर्सी, टेबल, ज्वेलरी समेत अन्य सामान मिलेगा। इसे शुरुआत में 50 कारीगर तैयार करेंगे। इससे उनकी आजीविका चलेगी। वन विभाग के संरक्षण में बांस शिल्प कारीगर अपनी कला का हुनर दिखाएंगे। पोआमा में ही इस सामग्री का शोरूम होगा।
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बांस शिल्पियों को जल्द दिलाएंगे ट्रेनिंग
वन अधिकारी कह रहे हैं कि प्रारंभिक चरण में 50 बांस शिल्पियों को ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। जिसमें बांस शिल्प कला सीखकर सेंटर की शुरुआत करेंगे। इसके बाद दूसरे बांस शिल्पियों को जोड़ा जाएगा।
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छिंदवाड़ा के बांस का ही होगा उपयोग
इस बांस शिल्प सेंटर में छिंदवाड़ा में ही उपलब्ध बांस का उपयोग होगा। वन अधिकारियों के अनुसार जिले में उच्च क्वालिटी का बांस जंगलों में उपलब्ध है। बालाघाट से बांस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्षेत्रीय बांस से ही फर्नीचर बनाना संभव होगा।
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इनका कहना है...
पोआमा बांस शिल्प सेंटर में बिजली कनेक्शन तथा मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दो माह में इसका संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
-ब्रजेन्द्र श्रीवास्तव, डीएफओ, पूर्व वनमण्डल छिंदवाड़ा।
Published on:
27 Apr 2023 07:02 pm
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