छिंदवाड़ा. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश और जिला प्रशासन के कड़े निर्देशों के बाद अब चोरी छिपे प्लास्टर आफ पेरिस की प्रतिमाएं तैयार कर उन्हें बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही है। चालाकी से वे प्रतिमाओं के बेस और पटिए को मिट्टी का बनाकर ज्यादातर हिस्सों में पीओपी उपयोग कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र और दूसरे प्रदेशों से बनी हुई मूर्तियां भी जिले में बेचने के लिए आने के समाचार मिले हैं।
शासन और स्थानीय अधिकारियों के निर्देश के बाद छिंदवाड़ा शहर में परंपरागत मूर्तियां बनाने वाले कलाकार तो मिट्टी से प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं लेकिन जो इस व्यवसाय में नहीं हैं वे पीओपी की मूर्तियों का बाजार लगाने की फिराक में हैं। गौरतलब है पिछले दिनों अपर कलेक्टर आलोक श्रीवास्तव ने जिले के सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गंभीरता से दौरा कर ये देखने कहा था कि पीओपी की प्रतिमाएं न बन पाए।
यदि बनती है तो उन्हें जब्त किया जाए और संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाए। इसके बाद भी स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा है। ध्यान रहे प्रतिमाएं पीओपी की है या मिट्टी की यह आसानी से समझ में भी नहीं आता। जांच करने गए अधिकारियों को मिट्टी की प्रतिमाएं बताकर भी कईं बच निकलते हैं।
कोयलांचल मुख्य गढ़खिरसाडोह से लेकर परासिया, चांदामेट, भंडारिया में पीओपी की प्रतिमाएं गुपचुप तरीके से इस बार भी बनाई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार परासिया में बाजार मुहल्ला, हनुमान मंदिर के पास, पोस्ट आफिस के पीछे और चांदामेटा में ये प्रतिमाएं तैयार कर भेजने का काम शुरु हो गया है।
इसी तरह देलाखारी में पुलिस चौकी के पास दो जगह ये मूर्तियां बड़ी मात्रा में बनाने की बात कईं कुंभकारों ने कही है। बिछुआ में भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पीओपी का इस्तेमाल मूर्तियां बनाने में किया जा रहा है।
प्रजापति संघ पर्चे बांट कर रहा अपीलकुंभकार प्रजापति समाज संघ शहर भर में पर्चे बांटकर मूर्तिकारों को सिर्फ मिट्टी की प्रतिमाएं बनाने की अपील कर रहा है। संघ के अध्यक्ष मंगल मालवीय ने बताया कि शहर के लगभग 300 मूर्तिकारों के हम संपर्क में है और सभी केवल मिट्टी की प्रतिमाएं बना रहे हैं। दूसरी जगह पीओपी की प्रतिमाएं बन रही है तो यह प्रशासन का काम है कि वह इनके खिलाफ कार्रवाई करे।