नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालय प्रबंधन, प्रकाशक, दुकानदार प्रति छात्र न्यूनतम एक हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई करेंगे। अभिभावकों को मजबूरन विद्यालय की निर्धारित दुकान से कमीशन की किताबों को प्रिंट रेट पर खरीदना पड़ेगा, जिसमें विद्यालयों का न्यूनतम 30 प्रतिशत कमीशन तय होगा। स्टेशनरी के प्रत्येक बंडल की कीमत तीन से साढ़े तीन हजार रुपए के बीच होती है। कमीशन के इस खेल से शिक्षा की गुणवत्ता भी खत्म हो रही है, क्योंकि निजी पब्लिसर्स की पुस्तकों की गुणवत्ता एनसीईआरटी के मुकाबले खराब होती है।