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निजी स्कूलों में पहुंचने लगा कमीशन का बंडल

विद्यालय संचालक बनकर रिपोर्टर ने जब एक दुकानदार से बात की तो सारा खेल खुलकर सामने आ गया। रिपोर्टर को किताबों पर 15 से 40 प्रतिशत तक कमीशन का ऑफर मिला। बातों-बातों में दुकानदार ने इस कमीशन का प्रतिशत बढ़ाने के भी संकेत दिए।

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mithilesh dubey

Mar 16, 2016

chhindwara

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छिंदवाड़ा. निजी स्कूलों में फिर अभिभावकों की जेब काटने की तैयारी शुरू हो गई है। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों को लूटने का जरिया बनाया जा रहा है। गुणवत्ता परखने के नाम पर संचालक, प्रकाशक व दुकान संचालकों के बीच कमीशनबाजी की सेटिंग-गेटिंग चल रही है। विद्यालय संचालक बनकर रिपोर्टर ने जब एक दुकानदार से बात की तो सारा खेल खुलकर सामने आ गया। रिपोर्टर को किताबों पर 15 से 40 प्रतिशत तक कमीशन का ऑफर मिला। बातों-बातों में दुकानदार ने इस कमीशन का प्रतिशत बढ़ाने के भी संकेत दिए।

1000 रुपए की अतिरिक्त कमाई

नए शैक्षणिक सत्र में विद्यालय प्रबंधन, प्रकाशक, दुकानदार प्रति छात्र न्यूनतम एक हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई करेंगे। अभिभावकों को मजबूरन विद्यालय की निर्धारित दुकान से कमीशन की किताबों को प्रिंट रेट पर खरीदना पड़ेगा, जिसमें विद्यालयों का न्यूनतम 30 प्रतिशत कमीशन तय होगा। स्टेशनरी के प्रत्येक बंडल की कीमत तीन से साढ़े तीन हजार रुपए के बीच होती है। कमीशन के इस खेल से शिक्षा की गुणवत्ता भी खत्म हो रही है, क्योंकि निजी पब्लिसर्स की पुस्तकों की गुणवत्ता एनसीईआरटी के मुकाबले खराब होती है।

पत्रिका रिपोर्टर ने स्कूल संचालक बनकर जाना कमीशन का खेल

रिपोर्टर: मैंने आपसे किताब के बारे में बात किया था।
संचालक: जी बताइए।

रिपोर्टर: मैंने तामिया में कक्षा एक से आठ तक स्कूल खोला है। एनसीईआरटी की बुक चलाना अनिवार्य है क्या।
संचालक: जिले के सभी ब्रांडेड स्कूल निजी प्रकाशन की चला रहे हैं आप भी चलाइए। आप पर अनिवार्य क्यों होगा। मेरे पास 40 निजी प्रकाशक की बुक हैं।

रिपोर्टर: किस निजी प्रकाशक की किताब चलाना बेहतर है।
संचालक: ब्रांडेड स्कूल में जो हैं वहीं किताब चलाइए, आप को भी फायदा होगा और हमारा भी फायदा होगा।

रिपोर्टर: एनसीईआरटी की किताबें क्यों नहीं।
संचालक: सार्टेज बहुत रहता है। कभी-कभी तो घाटा भी हो जाता है।

रिपोर्टर: अभी नया स्कूल खोला है। कुछ फायदे के बारे में बताइए।
संचालक: आप मेरे गोदाम पर आइए आमने-सामने बैठकर बात कर लेते हैं।

रिपोर्टर: मैं कल अपने मैनेजर को लेकर आऊंगा। फिर भी एक बार बता देते तो अच्छा होता।
संचालक: देखिए अलग-अलग किताब पर अलग-अलग फायदा है। कम से कम 15 से 25 प्रतिशत तक दे सकते हैं। आप आइए फिर मिलकर बात करते हैं।

रिपोर्टर: और कोई फायदा भी है क्या
संचालक: अगर आप कम्पनी का दिया टारगेट पूरा कर लेते हैं तो कम्पनी आपको फंड भी देगी।


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