
मंतोष कुमार सिंह
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा विद्यार्थियों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। यह स्थापना के चार साल बाद भी अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहा है। बरसों के संघर्ष और आंदोलन के बाद छात्र और छात्राओं की समस्याओं को दूर करने के लिए वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। सैकड़ों कॉलेजों के लाखों विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता आधारित शिक्षा देने के लिए गतिविधियां शुरू हुईं। लेकिन हुआ यह कि विश्वविद्यालय का संचालन पीजी कॉलेज के पुस्तकालय में शुरू हुआ। आज भी विश्वविद्यालय को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है। स्वीकृत स्टाफ की नियुक्ति भी नहीं की गई है।
संसाधनों के अभाव में विश्वविद्यालय का संचालन हो रहा है। अध्ययन, अध्यापन और परीक्षण के लिए संघर्ष जारी है। विवि भवन, पर्याप्त स्टाफ, शिक्षण विभाग और संसाधनों के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। विश्वविद्यालय केवल परीक्षा कराने और परीक्षा परिणाम जारी करने तक सीमित रह गया है। यही वजह है कि परीक्षा परिणाम भी बेहतर नहीं है। विद्यार्थी भी खुश नहीं है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अनुत्तीर्ण हुए हैं। असंतुष्ट विद्यार्थी आंदोलन की राह पर हैं। बैतूल, बालाघाट और सिवनी के विद्यार्थी छिंदवाड़ा पहुंचकर प्रदर्शन कर चुके हैं। आधा दर्जन से अधिक बार विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र-छात्राओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा है, फिर भी स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है।
संबंधित कॉलेज भी विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों की समस्याओं के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। ऐसे में सामंजस्य की स्थिति नहीं बन पा रही है। विश्वविद्यालय और कॉलेजों को आपसी सामंजस्य से विद्यार्थियों की नाराजगी को दूर करनी होगी। उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना करा कर विवाद को खत्म करना होगा। यह तात्कालिक समाधान होगा। स्थायी समाधान तो विश्वविद्यालय की समस्त आधारभूत जरूरतों की पूर्ति से ही हो सकेगा। विश्वविद्यालय के लिए जमीन का आवंटन पहले ही हो चुका है। अब जल्दी से भवन के निर्माण के लिए मंजूर 485 करोड़ रुपए के बजट जारी किया जाए। इसी तरह स्वीकृत 400 पद भरने की प्रक्रिया भी शुरू की जाए, ताकि विश्वविद्यालय का उद्देश्य पूर्ण हो।
Published on:
19 Apr 2023 07:20 pm
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