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भाई-भाई में प्रेम का निर्माण करती है रामायण

आदिशक्ति मां भवानी मंदिर में हभप रामराव ढोक महाराज के मुखारविंद से चल रही श्रीरामकथा के 6 वें दिन उन्होंने राम-भरत मिलन की कथा सुनाई। उन्होंने आज के

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Ramlila staged

Ramlila staged

मोहगांव हवेली . आदिशक्ति मां भवानी मंदिर में हभप रामराव ढोक महाराज के मुखारविंद से चल रही श्रीरामकथा के 6 वें दिन उन्होंने राम-भरत मिलन की कथा सुनाई।
उन्होंने आज के परिवेश में फैले पारिवारिक वैमनस्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाई-भाई में प्रेम निर्माण करने की शाला हैं रामायण। उन्होंने कहा कि पारिवारिक त्याग का प्रतीक रामायण हैं तो पारिवारिक लोभ का प्रतीक महाभारत हैं। यहां भाई-भाई के लिए राजपाठ त्याग करने उतारु हैं तो वहां भाई-भाई का छीनने को। कथा के दौरान उन्होंने सीताहरण प्रसंग पर बोलते हुए कहा कि यहां महाबली रावण , सीता माता का हरण करता हैं तो उसे रोकने का प्रयास एक पक्षी जटायु करता हैं। उधर महाभारत में भरी राज सभा में द्रौपदी का चीर हरण अदना सा दुष्शासन करता हैं और भीष्म पितामह सहित बड़े-बड़े महारथी रोकने का साहस तक नहीं करते, मौन बैठे रहते हैं। इसलिए जटायु पक्षी की मृत्यु भगवान की गोद में तो भीष्म पितामह की मृत्यु बाणों की शैय्या पर हुई।
उन्होंने शबरी प्रसंग पर कहा कि जात-पात ऊंच नीच का भेदभाव इंसान ने पैदा किए है ईश्वर ने नहीं। राम ने तो शबरी के झूठे बेर खाने से परहेज नहीं किया ईश्वर ने तो सभी को एक सा बनाया हैं। कथा का समापन गुरुवार को होगा। इस दौरान सांसद कमलनाथ भी कथा का श्रवण करने मोहगांव हवेली पहुंचेंगे।
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छात्रों ने किया श्रमदान
उमरानाला ञ्च पत्रिका. मध्य प्रदेश अभियान परिषद द्वारा प्रायोजित नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम के अंतर्गत मोहखेड़ विकासखंड में जिला समन्वयक पवन सहगल, खंड समन्वयक भवानी कुमरे के निर्देशन में उमरा नदी उद्गम स्थल केराझिरी पहुंचकर सीएमसीएलडीपी के बीएसड़ब्ल्यू पाठ्यक्रम के छात्रों ने श्रमदान से साफ-सफाई के कार्य किए । छात्रों ने ग्रामीणों को वर्तमान में पानी की समस्या को देखते हुए नदियों के पुनर्जीवन के लिए नदियों के गहरीकरण तथा उनकी साफ-सफाई के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया। मेंटर कैलाश सोनेवार ने छात्रों तथा ग्रामीणों को बताया कि यदि समय रहते यदि नदियों का पुनर्जीवन नहीं किया गया आने वाली पीढ़ी के लिए जल संकट गहरा जाएगा इस प्रेरणा संवाद से प्रेरित होकर ग्राम के निवासियों ने नदी के गहरीकरण के लिए श्रमदान करने का वचन दिया। जैसा की सर्वविदित है कि उमरा नदी पर मोहखेड़ विकास खंड में दो जलाशय उमरानाला जलाशय तथा सारोठ जलाशय के बनने से आस.पास के गांवों में किसानों की खेती में सिंचाई के लिए पानी में उपलब्ध हो रहा है।