छिंदवाड़ा. स्कूली शिक्षा विभाग स्कूलों की दशा सुधारने के लिए विभिन्न सकारात्मक प्रयास कर रहा है। शाला सिद्धि अभियान इसी में से एक है। इसके अंतर्गत प्राथमिक से लेकर हायर सेकण्डरी स्कूलों की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों की मॉनिटरिंग के लिए सेवानिवृत्त प्राचार्यों की अतिरिक्त सेवा लिए जाने की योजना बनाई जा रही है। फिलहाल विभाग प्राचार्यों को कितना मानदेय देगा इस पर विचार-विमर्श चल रहा है।
शाला सिद्धि योजना अंतर्गत जिले के चिह्नित संकुलों में आने वाले विभिन्न स्कूलों की जांच कर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित स्कूलों के शैक्षणिक एवं अन्य व्यवस्थाओं के स्तर तय किए जाएंगे। इस अभियान को चलाने की मंशा प्राचार्यों द्वारा निष्पक्ष रूप से मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार करना बताया जा रहा है और शाला की गुणवत्ता का सही आकलन करने में अहम भूमिका निभाना है।
46 मानकों पर होगा मूल्यांकन
शाला सिद्धि अभियान अंतर्गत मिली जानकारी के अनुसार चिह्नित शालाओं को तीन स्तर में बांटा जाएगा। जिसमें पहला मूल्यांकन पर आधारित होता, दूसरा मध्यम परिणाम लाने वाले स्कूल के आधार पर तथा तीसरा श्रेष्ठ विद्यालय होगा। इसके बाद मूल्यांकन कार्य प्रारम्भ होगा। प्राचार्यों द्वारा शालाओं की आंतरिक व बाहरी गुणवत्ता को सात तथा 46 मानकों पर परखा जाएगा।
एक संकुल से आठ स्कूलों का चयन
उपसंचालक एमपी चौरिया ने बताया कि जिले में करीब 56 संकुल केंद्र हैं तथा 99 जनशिक्षा केंद्र संचालित हैं। शाला सिद्धि अभियान अंतर्गत प्रत्येक जनशिक्षा केंद्र से चार प्राथमिक तथा चार माध्यमिक स्कूलों का चयन किया जाएगा। इस प्रकार करीब 792 स्कूलों की मॉनिटरिंग की जाएगी। बीआरसी सहित पांच-पांच शिक्षकों को अभियान की सफलता के लिए सहयोग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इनका कहना है
शासन के निर्देश के अनुसार शाला सिद्धि योजना अंतर्गत सेवानिवृत्त व्याख्यता एवं प्राचार्यों की अतिरिक्त सेवा ली जाएगी। इस योजना से उनके अनुभव का उचित लाभ मिल सकता है।
जीएस बघेल, जिला परियोजना समन्वयक