
क्षिप्रा में इस तरह गंदगी पसरी हुई है
छिंदवाड़ा/पांढुर्ना से गुजरती वर्धा नदी दक्षिण भारत की प्रमुख नदी गोदावरी की सहायक नदी है इसलिए इसके केचमेंट एरिया में आनेवाले पांढुर्ना के 9 गांवों को नेशनल प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इन गांवों में राजस्व,वन समेत निजी भूमि में चैकडेम,प्लांटेशन समेत अन्य मृदा संरक्षण के काम किए जाएंगे। इससे बारिश में नदी कटाव में मदद मिलेगी। इस सिलसिले में हैदराबाद फारेस्ट एजेंसी के एपीसीसीएफ रैंक के अधिकारी रत्नाकर जौहरी छिंदवाड़ा पहुंचे और दक्षिण वनमण्डल के डीएफओ और एसडीओ से चर्चा की।
गोदावरी नदी और सहायक नदियों के कैचमेंट एरिया में मिट्टी कटाव को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसमें सात राज्यों से गुजरनेवाली नदियों के केचमेंट एरिया पर फोकस किया गया है। मप्र में छिंदवाड़ा और मुलताई बैतूल से बहनेवाली नदी वर्धा गोदावरी नदी में जाकर मिलती है। छिंदवाड़ा में दक्षिण वनमण्डल के अधीन सौंसर अनुभाग के पांढुर्ना रेंज के पेण्डोना गांव से इसका जुड़ाव मिलता है। वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र के कम्पार्टमेंट नम्बर 2064 और 2065 को चिन्हित किया गया है,जहां पहाड़ी के बीच से वर्धा नदी अपना अगला सफर तय करती है। इस नेशनल प्रोजेक्ट में वर्धा नदी के केचमेंट एरिया के दो किमी क्षेत्र को शामिल करने पर चर्चा हुई है। जिसमें चैकडेम,प्लांटेशन समेत भू-जल व मृदा संरक्षण के काम किए जाएंगे। इससे नदी का मिट्टी कटाव कम होगा।
फिलहाल पांढुर्ना का प्रोजेक्ट करीब दस लाख रुपए का बताया गया है। आगे इस पर बजट बढ़ाया जा सकता है।दक्षिण वनमण्डल के डीएफओ साहिल गर्ग का कहना है कि हैदराबाद के अधिकारी पांढुर्ना के दो कम्पार्टमेंट के प्रोजेक्ट पर सहमत हो गए हैं। जिस पर आगे भी चर्चाएं जारी रहेगी। जिस पर वन विभाग को भू-जल व मृदा संरक्षण के लिए बजट मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह नेशनल प्रोजेक्ट ठीक गंगा नदी की तरह है। इससे जुडऩा उत्साहवर्धक है।
Published on:
28 Dec 2019 11:50 am
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