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हमारे यहां की छोरियां भी नहीं हैं छोरों से कम…

अगर आपने फिल्म 'दंगल देखी है तो अभिनेता आमिर खान द्वारा बेटियों के लिए कहा गया संवाद जरूर याद होगा।

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Prashant Sahare

Jan 02, 2017

chhindwara

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छिंदवाड़ा .अगर आपने फिल्म 'दंगल देखी है तो अभिनेता आमिर खान द्वारा बेटियों के लिए कहा गया संवाद जरूर याद होगा। जिसमें चार बेटियों से निराश पिता की चेतना जागती है तो कहता है कि हमारी 'छोरियां क्या छोरों से कम हैं । फिल्म का यह डायलॉग वास्तविक रूप में अब लोगों को प्रेरित करने लगा है। हालांकि छिंदवाड़ा में ऐसे भी एक पिता हैं जिन्होंने बेटियों के रेसलिंग में जाने के मन को भा लिया और पूरा परिवार मिलकर उनका सपोर्ट कर रहा है।

दो बहनें अपने सपनों को पंख लगाने में जुट गई हैं। एक ने तो शुरुआत करते हुए प्रतिभा का लोहा भी मनवा दिया है। हम बात कर रहे हैं छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ कस्बे की पहलवान शिवानी पवार की। जिनके पिता किसान हैं। कहते हैं कि हमारी बेटियां, बेटों से कम नहीं। शिवानी ने दसवीं तक की पढ़ाई उमरेठ से करने के बाद इन दिनों भोपाल के नूतन कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रही हैं। तुर्की में हुए स्कूल वल्र्ड गेम में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था।

ओलम्पिक में मेडल जीतने की चाह: शिवानी

पहलवान बनने का सपना कब देखा।
बचपन में सिर्फ पढ़ाई करती थी।थोड़ी बड़ी होने के बाद समर कैम्प में फुटबाल खेला। फिर एथलेटिक्स। कुछ माह बाद रेसलिंग का ट्रायल दिया। उसमें सलेक्ट होने के बाद मध्यप्रदेश मार्शल आर्ट कुश्ती अकादमी में प्रवेश मिल गया।

कुश्ती की प्रैक्टिस के बारे में कुछ बताइए।
एमपी स्पोर्टस एकेडमी में कोच मोनिका चौधरी और साथी खिलाडिय़ों के साथ हम यहां अच्छी प्रैक्टिस करते हैं। पिछले कुछ सालों में सागर, रीवा और इंदौर में कई मेडल जीते हैं। जनवरी में पटना में आयोजित जूनियर नेशनल कॉम्पीटिशन में भी गोल्ड मेडल जीतने का लक्ष्य है। मेरी कोशिश है ओलम्पिक तक जाने की। साक्षी मलिक की तरह मुझे भी मेडल लेकर आना है।

अपनी कामयाबी के सफर में किसे खास मानती हो।
मेरे परिवार से पिता नंदलाल पवार, माता पुष्पा पवार और दादाजी रघुनंदन पवार ने हमेशा मुझे सपोर्ट किया। मेरे मामा रवि पवार कोयला खदान में कर्मचारी है। वे बहुत हेल्प करते हैं। इसके अलावा कोच कलसराम मर्सकोले, कोच फातिमा बानो, मोनिका चौधरी, विनय प्रजापति का खास योगदान रहा है।

बहन रतिका भी कुश्ती में सक्रिय
शिवानी की छोटी बहन रितिका अभी कक्षा 10वीं में अध्ययनरत हंै। वह भी अपनी बड़ी बहन की तरह कुश्ती में ही कॅरियर बनाना चाहती है। शिवानी जहां पिछले तीन साल से कुश्ती में सहभागिता कर रही हैं, वहीं रितिका को एक साल हो गया है।

जब अपनी प्रतिद्वंद्वी को पहले पटकनी दी, फिर मरहम लगाया
पिछले दिनों सागर में आयोजित राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में 48 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले में खेल भावना की मिसाल देखने को मिली। यह मुकाबला भोपाल की शिवानी पवार एवं जयारानी के बीच हुआ। शिवानी के जोरदार दांव से जया चित हो गईं। इस बीच जया को पेट के पास चोट लग गई। जब जया दर्द से कराह उठीं, तो उनकी मदद शिवानी ने ही की। शिवानी पांच मिनट तक जया की चोट को ठीक करने का प्रयास करती रहीं। खेल के मैदान में ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है।