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कर्मयुद्ध के लिए गोकुल छोड़ मथुरा पहुंचे थे कृष्ण

सुभाष कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा

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shrimad bhagwat katha

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श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की खुशी में झूमे श्रद्धालु
छिंदवाड़ा. गोकुल की गलियों में अपनी बाल लीला दिखाने के बाद जब मथुरा से उनका बुलावा आया तो ब्रजवासियों पर तो मानों पहाड़ टूट पड़ा। यशोदा का लाल उनसे बिछडऩे वाला था। ग्वाल बाल अपने सखा से बिछडऩे का सोच दुखी थे तो गोपियां उनके विरह का सोच का व्याकुल हो उठीं। कृष्ण ने उन्हें समझाया कि वे कर्मयुद्ध पर जा रहे हैं। उन्हें यह काम भी पूरा करना है। मथुरा पहुंचकर उन्होंने अत्याचारी कंस का वध किया और अपने माता-पिता के साथ लोगों को भी उनके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। सुभाष कॉलोनी में चल रही भागवत कथा में यह बात अचल कृष्ण शास्त्री ने कही।
कथा के छठवें दिन उन्होंने गोपियों संग रासलीला और उद्धव गोपी संवाद का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि गोपियां कृष्ण के विरह में व्याकुल हो उठीं तो भगवान कृष्ण ने उद्धव को गोपियों के पास भेजा। रविवार को कथा में श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा भी सुनाई गई। बड़ी संख्या में उपस्थित हुए श्रद्धालुओं ने भगवान का विवाह उत्साह का साथ मनाया। इस मौके पर झांकी भी सजाई गई थी। खुशी में श्रद्धालु नृत्य करते दिखे।

गुलाबरा पहाड़े कॉलोनी में कथा के दौरान हुआ शिव विवाह

शहर के गुलाबरा क्षेत्र में पहाड़े कॉलोनी में चल रही भागवत कथा में रविवार को पं जितेंद्र दुबे ने शिव विवाह की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि शिवा के बिना तो शिव भी अधूरे हैं। उन्होंने कहा कि पति और पत्नी में आपसी समझ और विश्वास होना जरूरी है। उन्होंने शिव और सती की कथा बताते हुए कहा कि शिव ने सती को पिता के यहां यज्ञ में शामिल न होने कहा, लेकिन वो नहीं मानी और अग्निकुंड में उन्हंे जीवन समाप्त करना पड़ा। बाद में वह हिमाचल के यहां जन्मीं और घोर तपस्या के बाद फिर पार्वती के रूप में महादेव को पाने में सफल हुईं। पंडितजी ने कहा कि शिव श्रद्धा और पार्वती विश्वास का प्रतीक हंै और दोनों के मिलन से पुरुषार्थ रूपी कार्तिकेय का जन्म हुआ।