
shrimad bhagwat katha in hindi
छिंदवाड़ा. भगवान को पाने के लिए हम वर्षों पूजा-अर्चना करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं। उसके बाद भी भगवान के दर्शन नहीं हो पाते। भगवान तो भक्तवत्सल हंै फिर ऐसा क्यों होता है? अपने चित्त और मन को एकाग्र कर हम उनका भजन नहीं कर पाते इसलिए। ध्रुव ने तो कुछ वर्षों की तपस्या में ही भगवान से साक्षात्कार किया और ऐसा पद प्राप्त किया कि आज तक उन्हें कोई उनके स्थान से हटा नहीं पाया। यह बात पं नंदकिशोर शास्त्री ने भागवत प्रवचन के तीसरे दिन कही।
रॉयल चौक में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को उन्होंने कथा की शुरुआत सती चरित्र से की। उन्होंने बताया कि सती ने शिव को पाया, लेकिन जल्द से उनसे विलग होना पड़ा। परमेश्वर के प्रति उनकी आस्था और विश्वास दृढ़ नहीं था। इसलिए उनके मना करने के बावजूद वे पिता के यहां गईं और लज्जित होकर उन्हें सती होना पड़ा। बाद में पार्वती के रूप में पुन: जन्म लेकर वे महादेव को मिलीं। ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि माता के संस्कार और आशीर्वाद से उन्होंने परमपद प्राप्त किया। बुधवार को भगवान के जन्म की कथा सुनाई जाएगी।
Published on:
09 Jan 2019 09:07 am
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