नकदी फसल पर जोर
दुर्गेश का मानना है कि परम्परागत खेती में अच्छी बातों को अपनाया जाना चाहिए, लेकिन जो समय के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें छोड़ देने में ही भलाई है। हमारे पूर्वज तो गेहूं व मक्का ही लगाते थे , लेकिन अब ये जरूरी नहीं। खेती ऐसी हो कि लोग फसल खरीदने खुद चल कर आएं। दाम हाथों हाथ मिले। इसके लिए बाजार और लोगों की जरूरतों को समझना होगा। यही वजह है कि अभी उन्होंने लहसुन और टमाटर की फसल लगाई है। इनके भाव भी अच्छे मिल रहे हैं। यदि वे पूरे खेत में सिर्फ गेहूं ही लगाते तो उतना लाभ नहीं होता और बेचने में समस्या आती।