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छिंदवाड़ा

सेल्फ फाइनेंस कोर्स में दाखिला लेने में विद्यार्थी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी

सेल्फ फाइनेंस कोर्स को ज्यादा बढ़ावा दे रही है।

छिंदवाड़ाJul 06, 2024 / 06:25 pm

ashish mishra

  • कॉलेजों में हर वर्ष बंद हो जा रहे सेल्फ फाइनेंस कोर्स, फिर भी विभाग का फोकस
छिंदवाड़ा. जिले के शासकीय कॉलेजों में संचालित सेल्फ फाइनेंस कोर्स विद्यार्थियों के कमी के कारण बंद होते जा रहे हैं। इसके बावजूद भी नए सत्र में कॉलेजों में कई सेल्फ फाइनेंस कोर्स खुलेंगे। दरअसल उच्च शिक्षा विभाग स्कील डेवलपमेंट के नाम पर बीते कुछ वर्ष से शासकीय कोर्स की जगह सेल्फ फाइनेंस कोर्स को ज्यादा बढ़ावा दे रही है। इन कोर्स की फीस शासकीय कोर्स की तुलना में काफी ज्यादा होती है। ऐसे में विद्यार्थी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज की बात करें तो यहां पांच से अधिक कोर्स सेल्फ फाइनेंस से संचालित हो रहे हैं। इसमें डिप्लोमा एवं डिग्री दोनों कोर्स शामिल हैं। कॉलेज ने तीन साल पहले योगा और फिटनेस मैनेजमेंट का डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ किया। एक साल(दो सेमेस्टर) के योगा पाठ्यक्रम की फीस लगभग 14000 रुपए है। वहीं फिटनेस मैनेजमेंट की भी फीस इतनी है। फिटनेस मैनेजमेंट पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों का रूझान न होने से अब यह कोर्स बंद होने के कगार पर है। इन पाठ्यक्रम में पहले वर्ष 9, दूसरे वर्ष 11 और तीसरे वर्ष एक भी विद्यार्थी ने दाखिला नहीं लिया। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2024-25 में इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से इंकार कर दिया है। हालांकि कॉलेज अपनी तरफ से प्रयास कर रहा है कि इस बार पाठ्यक्रम चालू हो जाए और अधिक से अधिक विद्यार्थी दाखिला लें। बताया जाता है कि सरकार सेल्फ फाइनेंस कोर्स को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर शासन जिम सहित अन्य संस्थानों में क्वालीफाई ट्रेनर की अनिवार्यता कर देती तो इस कोर्स की डिमांड भी बढ़ जाती।
कृषि सहित अन्य पाठ्यक्रम खोलने की तैयारी
पीजी कॉलेज का एक्सीलेंस कॉलेज में उन्नयन होने के बाद यहां कृषि, टूरिज्म, होटल मैनेजमेंट सहित कई अन्य पाठ्यक्रम शुरु करने की तैयारी है। हालांकि यह सभी कोर्स सेल्फ फाइनेंस से ही खोले जाने हैं। जिससे विद्यार्थियों का आर्थिक बोझ बढ़ेगा। शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि विभाग को चाहिए की वह खुद के खर्चे पर कोर्स प्रारंभ करें। सेल्फ फाइनेंस कोर्स में कॉलेजों पर दबाव बढ़ जाता है। पीजी कॉलेज में वर्तमान में बीबीए, बीसीए, बायो टेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, योगा, फिटनेस मैनेजमेंट सहित अन्य कोर्स सेल्फ फाइनेंस से चल रहे हैं। कुछ कोर्स में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम है।
क्या आ रही समस्या
विद्यार्थी स्किल डेवलपमेंट वाले कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं, लेकिन फीस अधिक होने की वजह से वे ऐसा नहीं कर पाते। सेल्फ फाइनेंस कोर्स में सारी सुविधा कॉलेज को ही जुटानी पड़ती है। बैठने की जगह, शिक्षक सहित अन्य संसाधन इसमें शामिल है। विद्यार्थियों के कम संख्या होने की वजह से कॉलेजों को कोर्स चलाने दिक्कत होती है। वे सुविधा नहीं दे पाते। जिससे कॉलेज में पाठ्यक्रम का संचालन कुछ समय बाद बंद हो जाता है। अगर उच्च शिक्षा विभाग कम फीस में इन कोर्स को संचालित करता तो अधिक संख्या में विद्यार्थी दाखिला लेते। बताया जाता है कि अधिक फीस के अलावा कोर्स बंद होने के मुख्य कारण में फैकल्टी अच्छी न होना, संचालन के नियमों में कमी, सिलेबस का अपडेट न होना, प्लेसमेंट न होना आदि भी है।
गल्र्स कॉलेज में भी समस्या
राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज में एमएससी बॉटनी, कमेस्ट्री, जुलॉजी, मैथ
कम्प्यूटर, एमएचएससी सहित अन्य पाठ्यक्रम सेल्फ फाइनेंस से संचालित हो रहे हैं। कुछ कोर्स छात्राओं की संख्या कम होने से बंद होने के कगार पर हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. यूके जैन ने बताया कि शासन स्किल डेवलपमेंट के नाम पर सेल्फ फाइनेंस कोर्स को बढ़ावा दे रही है। इससे शासन को सुविधाएं, प्राध्यापक नहीं देना पड़ता। सरकार का पैसा भी बच जा रहा है। कई बार ऐसा हुआ कि कागज में ही सेल्फ फाइनेंस खुले और बंद हो गए। इसके पीछे वजह विद्यार्थियों की दिलचस्पी न होना था। वरिष्ठ प्राध्यापक का कहना है कि अगर को सही मायने में स्किल डेवलपमेंट के कोर्स शासकीय खर्च पर खोले जाने चाहिए, तभी यह सफल हो पाएगा। इसके अलावा सेल्फ फाइनेंस से भी जो कोर्स खुलें हैं उसमें रोजगार को बढ़ावा देने पर भी शासन को फोकस करना होगा।

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