दो बहनों में अंकिता बड़ी है, जो ठीक से बैठ भी नहीं सकती। अंकिता के पिता सत्यनारायण नायडू छिंदवाड़ा में ही प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते हैं और मां शिक्षक हैं। वे बताते हैं कि अंकिता को ये बीमारी बचपन से ही। लेकिन बीमारी उसके इरादे को तोड़ नहीं पाई। बारहवीं के बाद बीसीए करने की ठानी और उसे पूरा भी किया। कम्प्यूटर की पढ़ाई के लिए बिस्तर पर ही लेटकर कम्प्यूटर की बारीकियां सीखीं। सभी परीक्षाएं भी लेटकर दी वह भी बिना किसी की मदद के।