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AMAZING: लेटकर की बीसीए तक की पढ़ाई, अब एमबीए की तैयारी

बीमारी के कारण लम्बाई लगभग तीन फीट ही बढ़ पाई है और हड्डियां तो न जाने कितनी ही बार टूट चुकी हैं। लेकिन मजूबत इरादों के बल पर अंकिता ने बीसीए पूरा कर आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रही है।

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mithilesh dubey

Apr 25, 2016

chhindwara

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मिथिलेश धर दुबे/छिंदवाड़ा. जिद नाम है उस हौसले का जिसमें नामुमकिन को मुमकिन बनाने का जुनून हो। बिरले ही होते हैं ऐसे जिद्दी और मजबूत लोग जिनके इरादों के सामने बड़ी से बड़ी परेशानी भी घुटने टेकने को मजबूर हो जाती है। ऐसी ही है 24 साल की अंकिता नायडू जो ओस्टोजेनेटिक इनपराफेक्टा नामक बीमारी से पीडि़त है। पेन की कैप उतारते वक्त ही कई बाद उसकी हाथों की हड्डियां टूट चुकी हैं। लेकिन ये उसकी जिद ही है कि हड्डियां तो टूटती हैं लेकिन हौसले नहीं। बीमारी के कारण लम्बाई लगभग तीन फीट ही बढ़ पाई है और हड्डियां तो न जाने कितनी ही बार टूट चुकी हैं। लेकिन मजूबत इरादों के बल पर अंकिता ने बीसीए पूरा कर आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रही है।

लेटकर पास की सभी परीक्षाएं

दो बहनों में अंकिता बड़ी है, जो ठीक से बैठ भी नहीं सकती। अंकिता के पिता सत्यनारायण नायडू छिंदवाड़ा में ही प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते हैं और मां शिक्षक हैं। वे बताते हैं कि अंकिता को ये बीमारी बचपन से ही। लेकिन बीमारी उसके इरादे को तोड़ नहीं पाई। बारहवीं के बाद बीसीए करने की ठानी और उसे पूरा भी किया। कम्प्यूटर की पढ़ाई के लिए बिस्तर पर ही लेटकर कम्प्यूटर की बारीकियां सीखीं। सभी परीक्षाएं भी लेटकर दी वह भी बिना किसी की मदद के।

सपना एमबीए कर नौकरी करने का

बीसीए पूरा करने के बाद अंकिता एमबीए की तैयारी कर रही है। इसके लिए वह सेल्फ स्टडी के साथ इंटरनेट का भी सहारा लेती है। सपना नैाकरी करने का है। उसने बैंक की भी कई परीक्षांए दी है। अंकिता कहती हैं कि नौकरी करने का मकसद बस इतना है कि मैं कम से कम अपना खर्च उठा पाऊं और घर के लिए कुछ कर पाऊं।

खुश हूं कि अभी तक बच्ची हूं

अंकिता अपना आदर्श अपने माता-पिता को मानती हैं। पिता सत्यनारायण अंकिता को परीक्षा सेंटर तक गोद में लेकर जाते हैं। अंकित बताती है कि उनके माता-पिता ने कभी मेरी बीमारी को मेरे सपनों के बीच नहीं आने दिया। मैं खुश हूं कि मैं अब भी माता-पिता की गोद में रहती हूं। अंकिता फेसबुक और वाट्सएप पर भी सक्रिय है।

देखें अपने जैसे लोगों के लिए क्या कहा अंकिता ने


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