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सड़ी-गली सब्जी भी बन सकती है सोना..ये होगा प्रयोग

शहर के बाजारों में सड़ी-गली सब्जियों से कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए जगह-जगह टांके बनाए जाएंगे।

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manohar soni

Aug 10, 2017

छिंदवाड़ा.शहर के बाजारों में सड़ी-गली सब्जियों से कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए जगह-जगह टांके बनाए जाएंगे। इससे गीले कचरे का सदुपयोग होगा वहीं खाद का उपयोग नर्सरी में पौधों को विकसित करने में किया जा सकेगा। नगर निगम ने इस कार्ययोजना पर काम करने की तैयारी शुरू कर दी है।
बुधवारी, इतवारी, शनिचरा और दीनदयाल **** समेत आसपास के सब्जी बाजारों में बैठने वाले दुकानदार अक्सर शाम के समय सब्जियां फेंक देते हैं। इसके साथ ही गीला कचरा भी काफी मात्रा में एकत्र होता है। इस कचरों को निगम की गाडि़यां एकत्र कर उसे शहर के बाहर कर देती है। प्रदेश के दूसरे नगर निगमों में इस गीली कचरों का उपयोग खाद बनाने में किया जाने लगा है। इस मॉडल को छिंदवाड़ा में अपनाने की तैयारी कर ली गई है। निगम आयुक्त इच्छित गढ़पाले ने बुधवार को स्वच्छता निरीक्षक अनिल मालवी को इस गीले कचरे और सड़ी-गली सब्जियों का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इस कार्ययोजना को १५ दिन में बनाना होगा। आयुक्त ने शहर के बाजार क्षेत्र में ही नाडेप टांके की जगह चयनित करने के लिए भी कहा है।

केंचुए बना देते हैं खाद
सड़ी-गली सब्जियों और गीले कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया यह है कि एक स्थल पर गड्ढा खोदकर उस पर पक्का टांका बना दिया जाता है। फिर उसमे उस कचरे को डाल दिया जाता है। इस कचरे में केंचुए छोड़ दिए जाते हैं और दवाओं का छिड़काव करने के बाद उसे बंद कर दिया जाता है। फिर ये केंचुए जैविक प्रक्रिया से कचरे को खाद में तब्दील कर देते हैं। इस खाद का उपयोग खेती के साथ ही पौधे को विकसित करने में लाभकारी है।

इनका कहना है...
शहर में सड़ी-गली सब्जियों और गीले कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इससे इस कचरे का सदुपयोग हो सकेगा। खाद का उपयोग नगर निगम की नर्सरी में किया जाएगा।
-इच्छित गढ़पाले, आयुक्त नगर निगम।