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छिंदवाड़ा.सूरज की तपन से मार्च में ही मई-जून की गर्मी का एहसास हो रहा है। जिला अस्पताल आयुष विंग में उल्टी दस्त, अतिसार, अरुचि, अपचन, चक्कर और सिरदर्द पीडि़त मरीज आ रहे हैं। इसे देखते हुए आयुष चिकित्सकों ने पीडि़तों को इससे बचाव के उपाय बताए हैं।
बसंत से ग्रीष्म ऋ तु के इस परिवर्तन को आयुर्वेद में ऋ तु संधि कहा जाता है। जब ठंड से गर्म वातावरण में प्रवेश किया जाता है। ग्रीष्म ऋ तु में सूर्य के तीक्ष्ण, उष्ण, रूक्ष्ण गुण से शरीर में कफ दोष क्षीण हो जाते हैं और वात वृद्धि होने से शरीर में मंदाग्नि हो जाती हैं। जिससे अपचन,अरुचि, उल्टी, दस्त, जी मचलना जैसी समस्या होती है। साथ ही सूर्य के तीक्ष्णता से इस समय वात पित्तज विकार भी ज्यादा देखने मिले हैं। जैसे एपिस्टेक्सिस नाक से खून आना, सिर दर्द, चक्कर, ज्वाइंट पैन, मुंहासे, बालों का पकना। इस ऋ तु में आहार विहार के विषय में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका धुर्वे ने बताया कि इस ऋतु में शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है इसलिए वाटर इनटेक अच्छा होना चाहिए। दिन में थोड़ी देर सोना इस ऋ तु में पथ्य बताया गया है। इस समय हमें पुरानी ऋतु के आहार विहार के धीरे-धीरे त्याग कर आने वालीं ऋतु के आहार विहार को अपनाना चाहिए। इससे ऋ तु संधि जन्य रोगों से बचा जा सकता है।
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रोग से बचाव के ये उपाय
1.कम से कम छह लीटर पानी का सेवन।
2.शरबत, नींबू, मौसंबी, गुलाब, उशीर, चंदन के शरबत पीएं।
3.तरबूज, अंगूर, मौसंबी, नारियल, संतरा , लीची का जूस लें।
4.सत्तू, चना, गेहूं भूनकर गुड़, इलायची के साथ सेवन।
5. खाने में मधुर, हल्के सुपाच्य ताजे भोजन का सेवन।
6.चुकंदर, ककड़ी, गाजर की सलाद के साथ ताजा मठ्ठा नमक या दही चीनी के साथ ले सकते हैं।
7. कटु, कषाय रस के ज्यादा सेवन करने से बचे।
8.चेहरे को सूती कपड़े से ढक कर बाहर निकले।
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Published on:
24 Mar 2022 06:06 am
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