
Teacher has taken such a big step in its discretion
छिंदवाड़ा . परासिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला नागलवाड़ी ढाना में पदस्थ सहायक अध्यापक कामता प्रसाद पवार स्वयं की दान की गई भूमि में बने स्कूल से बिछडऩे का दर्द सहन नहीं कर सके तथा इसके वियोग में फांसी लगाकर जान दे दी। बताया जाता है कि युक्तियुक्तकरण के तहत अमरवाड़ा के शासकीय प्राथमिक शाला सालीढाना में उनका स्थानांतरण हुआ था।
पुत्र मनोहर पवार का आरोप है कि उसके पिता अपने बड़े भाई रामप्रसाद पवार के साथ जिला शिक्षा अधिकारी के पास स्थानांतरण आदेश निरस्त करने के लिए आवेदन लेकर पहुंचे थे, लेकिन डीईओ ने पहले ज्वाइन करने को कहा अन्यथा सस्पेंड करने की बात कही। इस बात से वह काफी परेशान चल रहे थे। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी परासिया को दोषी मानते हुए एफआईआर दर्ज करने तथा न्यायिक जांच की मांग पुलिस अधीक्षक से की है। उमरेठ थाना प्रभारी मंगल सिंह धुर्वे का कहना है कि मर्ग
कायम कर प्रकरण में जांच की जा रही है। इधर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब मृतक को फंदे से उतारा गया, तब तक उनकी नाड़ी चल रही थी।
संकुल से भेजी गई गलत जानकारी
भाई गुलाब पवार ने बताया कि मृतक पवार वर्ष २००७ से नागलवाड़ी ढाना में कार्यरत थे। सात साल पहले एक दृष्टिहीन अध्यापक का चंदनगांव अटैचमेंट किया गया था। लेकिन वर्तमान में भी उनकी नियुक्ति उमरेठ में दर्शायी जाती है तथा वेतन भी यहां से निकालता है। लेकिन संकुल प्राचार्य ने यह जानकारी विभाग को नहीं बताई, इसके कारण दो शिक्षकों के कार्यरत होने पर भी मृतक का अतिशेष बताया गया। इसके लिए संकुल के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं।
शासन के निर्देशों का हवाला
डीईओ आरएस बघेल ने बताया कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत दिसम्बर माह में सीईओ जिला पंचायत के माध्यम से जारी ५० लोगों की सूची में कामता पवार का नाम भी शामिल था। उसने सम्बंधित स्कूल को ज्वाइन भी किया तथा २ व ३ जनवरी २०१८ को सालीढाना स्कूल में उपस्थिति भी हस्ताक्षर कर दर्ज कराई। वहीं शासन ने युक्तियुक्तकरण मामले में स्थगन आदेश जारी किया तथा ३० दिसम्बर को जारी सूची को निरस्त भी कर दिया गया। इसकी सूचना सभी विभागों में दे दी गई थी। वहीं शासन के निर्देशानुसार स्थानांतरण होने पर पहले ज्वाइन, इसके बाद संशोधन के आवेदन पर चर्चा की जाती है। अतिशेष में बताया कि दृष्टिहीन शिक्षक को छूट रहती है इसलिए शिक्षक कामता अतिशेष में आ गए थे।
Published on:
06 Jan 2018 12:00 pm
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