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प्रशासन का पुस्तक मेला महज छलावा, लोगों ने कहा- पुस्तक नहीं, कॉपी-पेन मेला

कई दुकानदारों ने पुस्तकों में कोई छूट नहीं दी, पेन-कॉपी पर जो छूट दुकानों से मिलती है बस वही मिली

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Pustak mela

अभिभावकों को कम कीमतों में पुस्तकें उपलब्ध करवाने के लिए महारानी लक्ष्मीबाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में दूसरी बार पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। इस बार नए सत्र के पूर्व ही तीन दिवसीय पुस्तक मेला लगा, लेकिन जिस प्रकार से अभिभावकों को पुस्तक मेला का लाभ मिलना चाहिए, उस तरह मिला नहीं। अभिभावकों ने बताया कि कई दुकानदारों ने पुस्तकों में कोई छूट नहीं दी और कॉपियों एवं पेन में जो छूट दुकानों से मिलती थी, उसी तरह पुस्तक मेला में भी मिली।

हालांकि कुछ अभिभावकों ने बताया कि दुकानों पर पुस्तकें लेने पर पूरा बिल चुकाना पड़ता था, पर पहली बार पता लगा कि छूट भी मिलती है। बहरहाल, जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के सहयोग से लगाए गए पुस्तक मेला से अभिभावकों को पुस्तक, कापियां एवं अन्य स्टेशनरी में मिलने वाली छूट की जानकारी मिली।

10 हजार से अधिक पहुंचे अभिभावक

शिक्षा विभाग का दावा है कि विगत 27 मार्च से शुरू हुए इस पुस्तक मेला में तीन दिनों तक करीब 10 हजार से अधिक पालकों एवं विद्यार्थियों ने पुस्तकें, कापियां एवं स्टेशनरी की खरीदी की। पहले एवं दूसरे दिन जो समस्याएं आईं उसमें सुधार किया गया। परासिया से आए दो पुस्तक एवं गणवेश विक्रेताओं ने न सिर्फ किफायती दामों में स्टेशनरी सामान उपलब्ध कराए, बल्कि तीसरे दिन स्काउट गाइड की छात्राओं को निशुल्क टीशर्ट का वितरण किया, साथ ही निशुल्क नोटबुक भी दी। मेले में जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल, सहायक संचालक डीपी डेहरिया, पीएल मेश्राम, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी एवं पुस्तक मेला प्रभारी दिनेश वर्मा और उनकी टीम उपस्थित रही।

कुछ ऐसा रहा पुस्तक मेला

परासिया तहसील से आए एक स्टेशनरी दुकानदार को एमएलबी प्राचार्य कक्ष के बगल में स्थान दिया गया, पर यहां से अभिभावकों के प्रवेश को रोका गया था। दूसरे दिन स्टेशनरी संचालक के विरोध के बाद स्थान पालकों को आने जाने दिया गया।

काफी बड़ा स्थान होने के बावजूद एक दुकानदार ने अपने दरवाजे के बाहर कतार लगवाकर पुस्तकें वितरित की। यहां भी उसका व्यवहार उसकी अपनी दुकान के समान ही रहा। दो दिनों तक छूट को लेकर पालकों एवं दुकानदारों में विवाद भी हुए।

कुछ पालकों ने बताया कि उनके बच्चे के स्कूल 10 दिन पहले ही शुरू कर दिए गए तो निर्धारित दुकान से पहले ही पुस्तक लेना पड़ा। गणवेश लेने गए, तो वह नहीं मिली।

एक छात्र की मां ने बताया कि उनके स्कूल का स्टॉल ही नहीं लगा था, जब स्कूल से जानकारी ली तो उन्होंने पाठ्यक्रम बदलने की जानकारी दी। एक अन्य पालक ने बताया कि उनके स्कूल ने कहा पांच अप्रेल के बाद किताबें निर्धारित दुकान से मिलेंगी।