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छिंदवाड़ा. चंदनगांव स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में विशेष प्रोजेक्ट के तहत इस साल के लिए भी संतरे के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस बार जून जुलाई में संतरे के 35 हजार से ज्यादा पौधे संतरा उत्पादक किसानों को देने की तैयारी है। गुणवत्तापूर्ण और रोगरहित पौधे यहां पर विशेष पोलीहाउस में तैयार किए जाते हैं। संतरे के बीज बोने से लेकर तो उनकी बडिंग तक का काम विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में यहां किया जा रहा है। पिछले तीन साल से यहां हर साल तीस हजार तक पौधे मध्यप्रदेश के साथ देश के विभिन्न प्रदेशों के किसान ले जाते हैं। इस बार लगभग पैतीस हजार पौधे देने की तैयारी संस्थान कर रहा है। अब तक यहां 70 हजार पौधों को ट्रांसप्लांट कर दिया गया है। यहां पर जम्बेरी और रंगपुर लाइम के पौधों में बडिंग कर सेतरे के पौधों को तैयार किया जाता है। ध्यान रहे यहां तैयार की जाने संतरे की कलम की देशभर में मांग है
विशेष पालीहाउस में किया जाता है अनुसंधान
यहां पौधों को तैयार करने के लिए विशेष रूप से बने पालीहाउस में काम किया जाता है। बीज से लेकर उसमें उपयोग में लाई जाने वाली मिट्टी तक को विश्ेाष रूप से उपचारित किया जाता है। बीज निकालने के बाद उसे विशेष दवाओं के जरिए रोगरहित बनाया जाता है। मिट्टी ऐसी उपयोग में लाई जाती है कि फंगस न लगे और पौधा सूखे न। विशेष तापमान यहां का बनाया जात है। बीज से रोपे निकलने के बाद उन्हे पालीथीन में रखकर लगभग दो से ढाई फिट तक का किया जाता है। पौधे का तना जब इस ऊंचाई पर पहुंच जाता है तब उसमें संतरे की कमल को ट्रांसप्लांट किया जाता है। बाद में इस बडिंग से संतरे के पौधे की कोपले फूटती है। इस दौरान वस्तु विशेषज्ञ, कीट विशेषज्ञ, दवा विशेषज्ञ इनकी देखरेख करते हैं।
चार साल में 75 हजार पौधे बेचे
अनंसुधान केंद्र से पिछले चार वर्षो में 75 हजार पौधे संतरा लगाने वाले किसानों को इसके बगीचों के लिए दिए जा चुके हैैं। टीएमसी प्रोजेक्ट के परियोजना समन्वय डा डीएन नांदेकर ने बताया कि इस केंद्र में तैयार होने वाले पौधों की गुणवत्ता को देखते हुए ही संतरा लगाने के इच्छुक किसान यहां के पौधों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने बताया कि पहले बीज हम एनआरसी नागपुर से मंगाते थे अब यहीं पर बगीचे में फल तैयार कर उनका बीज बनाया जाता है। उसे रोगरहित बनाकर फिर उसके पौधे तैयार किए जाते हैं। उसमें संतरे का पौधा तैयार करने बडिंग की जाती है। डा नांदेकर ने बताया कि एक लाख से ज्यादा बीज लगाए गए हैं उनमें से तैयार हो रहे पौधों में से लगभग सत्तर हजार पौधे ट्रांसप्लांट के बाद अब संतरे के पौधे का रूप ले रहे हैं।
देश भर में मांग
छिंदवाड़ा कृषि अनुसंधान केंद्र में तैयार होने वाले इन पौधों की गुणवत्ता बेहद अच्छी है। केंद्र के सहायक संचालक और परियोजना की अगुगाई कर रहे डा वीके पराडकर ने बताया कि देश के तीन अनुसंधान केंद्रों में छिंदवाड़ा भी एक है। यहां के पौधे प्रदेश के दूसरे जिलों में तो जा ही रहे हैं अब तो महाराष्ट, और दक्षिण के कई राज्यों से भी डिमांड बढ़ रही है। जम्मू कश्मीर तक से पौधो की मांग आई है लेकिन ट्रंासपोर्टेशन की उचित व्यवस्था के चलते हम वहंा अभी पौधे नहीं दे पा रहे हैं। उनका कहना है कि यहां के पौधे कई किसानों के बगीचों में अच्छे फल दे रहे हैं और उन्हें फायदा हो रहा है।
Published on:
24 Jan 2020 11:13 am
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