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# WORLD HEALTH DAY वायु प्रदूषण का असर, मां का दूध बन रहा जहर

हवा में मौजूद रासायनिक तत्व सांस के रोग, फेफड़ों में सूजन, स्किन की बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वायु प्रदूषण से ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचता है और यूवी किरणें धरती पर पहुंच कर स्किन कैंसर, आंखों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को क्षति पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज सांस की समस्या के आते हैं, जिसका प्रमुख कारण बढ़ता वायु प्रदूषण है।

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mithilesh dubey

Apr 05, 2016

chhindwara

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छिंदवाड़ा . सात अप्रैल को वर्ल्ड डे है। इसी अवसर पर हम बात कर रहे हैं हमारे देश में तेजी से बढ़ रहे वायु प्रदूषण के बारे में। प्रदूषण कंट्रोल नियंत्रक अधिकारी पीआर देव बताते हैं कि वायु मनुष्यों, जीवों व वनस्पतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। मनुष्य बिना भोजन-पानी के कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है लेकिन हवा के बिना कुछ ही मिनट भी जीवित रहना मुश्किल है। वायु में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 0.03 प्रतिशत कार्बन-डाय-आक्साइड एवं शेष निष्क्रिय गैस और जल वाष्प होती है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में करीब 6 लाख अरब टन हवा है। एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति एक दिन में 22 हजार बार श्वास लेता है। लेकिन आज वायुमंडल में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हवा में कई हानिकारक गैसों की संख्या बढ़ते ही जा रही है। एक अनुमान के अनुसार पिछले सात दशकों में 10 लाख टन कोबाल्ट, 8 लाख टन निकिल तथा 6 लाख टन आर्सेनिक सहित अन्य गैसें वायुमंडल में समाविष्ट हो चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में स्थिति भयावह हो जाएगी। हवा में मौजूद रासायनिक तत्व सांस के रोग, फेफड़ों में सूजन, स्किन की बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वायु प्रदूषण से ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचता है और यूवी किरणें धरती पर पहुंच कर स्किन कैंसर, आंखों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को क्षति पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज सांस की समस्या के आते हैं, जिसका प्रमुख कारण बढ़ता वायु प्रदूषण है।

प्रदूषण से मां का दूध बन रहा जहर

मां का दूध नवजात के लिए अमृत माना जाता है। ये वैज्ञानिक रूप से साबित हो चुका है लेकिन वर्तमान समय में माँ का दूध ही बच्चे के लिए जहर बन रहा है। बढ़ता प्रदूषण मां के दूध को अमृत से जहर बना रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वातावरण में फैला लेड सभी के सेहत के लिए नुकसानदायक है। मां के दूध से शिशुओं में इसकी अधिक मात्रा गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। यूपी के बरेली कॉलेज की जन्तु विज्ञान विभाग की डॉ. सीमा कुदेशिया, वनस्पति विज्ञान विभाग के रिटायर शिक्षक डॉ. डीके सक्सेना और पैथोलॉजिस्ट डॉ. शालीन दीक्षित ने शिशुओं को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध का टेस्ट लिया। टेस्ट में बरेली की 30, फरीदपुर और नवाबगंज की 20-20 और पीलीभीत, बदायूं की 30 और 20 महिलाओं को शामिल किया गया। जुलाई 2014-15 तक किए गए इस परीक्षण में जिन महिलाओं के दूध में लेड पाया गया, उनमें से ज्यादातर सड़कों के किनारे या चौबीस घंटे ट्रैफिक के बीच रहती हैं। इनमें से कुछ पेंट का काम भी करती हैं। डॉ. सीमा कुदेशिया ने बताया कि चूंकि पेट्रोल में लेड पाया जाता है इसी वजह से मां के दूध में लेड की मात्रा जांच की योजना बनी।

प्रदूषण से बढ़ रहा कैंसर

कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. दीपेंद्र सलामे के मुताबिक बताते प्रदूषण से ब्लड कैंसर के रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। क्योंकि लिम्फोमा सॉलिड ट्यूमर होकर एक तरह का ब्लड कैंसर है। यह प्रदूषण और कीटनाशकों के शरीर में प्रवेश करने पर बोनमेरो में गड़बड़ी होने से होता है। इसके आलावा वायु प्रदूषण बच्चों में ब्लड कैंसर के लिए जिम्मेदार है। करीब 100 बच्चों में 24 को होने वाला ब्लड कैंसर वायु प्रदूषण से होता है।

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