छिंदवाड़ा . सात अप्रैल को वर्ल्ड डे है। इसी अवसर पर हम बात कर रहे हैं हमारे देश में तेजी से बढ़ रहे वायु प्रदूषण के बारे में। प्रदूषण कंट्रोल नियंत्रक अधिकारी पीआर देव बताते हैं कि वायु मनुष्यों, जीवों व वनस्पतियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। मनुष्य बिना भोजन-पानी के कुछ दिनों तक जीवित रह सकता है लेकिन हवा के बिना कुछ ही मिनट भी जीवित रहना मुश्किल है। वायु में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 0.03 प्रतिशत कार्बन-डाय-आक्साइड एवं शेष निष्क्रिय गैस और जल वाष्प होती है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में करीब 6 लाख अरब टन हवा है। एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति एक दिन में 22 हजार बार श्वास लेता है। लेकिन आज वायुमंडल में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हवा में कई हानिकारक गैसों की संख्या बढ़ते ही जा रही है। एक अनुमान के अनुसार पिछले सात दशकों में 10 लाख टन कोबाल्ट, 8 लाख टन निकिल तथा 6 लाख टन आर्सेनिक सहित अन्य गैसें वायुमंडल में समाविष्ट हो चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में स्थिति भयावह हो जाएगी। हवा में मौजूद रासायनिक तत्व सांस के रोग, फेफड़ों में सूजन, स्किन की बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार हैं क्योंकि वायु प्रदूषण से ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचता है और यूवी किरणें धरती पर पहुंच कर स्किन कैंसर, आंखों और रोग प्रतिरोधक क्षमता को क्षति पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज सांस की समस्या के आते हैं, जिसका प्रमुख कारण बढ़ता वायु प्रदूषण है।