छिंदवाड़ा। जिस उपज मंडी की आय 24 करोड़ रुपए वार्षिक है, उसकी आधारभूत व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं। दरअसल, कुसमेली स्थित कृषि उपज मंडी 20 साल पहले इस क्षेत्र में स्थापित हुई। तब से अब तक जितनी भी व्यवस्थाएं थीं, वे सब मरम्मत के स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इनमें से कुछ को तो नए सिरे से बनाना जरूरी है। इनमें से पहले नंबर पर मंडी कार्यालय ही है, जिसकी छत, दीवार, सभी में दरार दिखने लगी है।