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यहां गला काटने पर भी मिलती है दुआ, जानें पूरी खबर

चिकित्सकीय टीम को दो घंटे की मशक्कत के बाद मिली सफलता, जिला अस्पताल में थाइराइड रोग का पहली बार ऑपरेशन

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Therapy for the first time of Thyroid Disease

Therapy for the first time of Thyroid Disease

छिंदवाड़ा. जिला अस्पताल में थाइराइड जैसे बडे़ ऑपरेशन भी होने लगे हैं। इससे थाइराइड (घेंघा रोग) से पीडि़त लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि बहुत साल पहले गले की गठानों के ऑपरेशन हुआ करते थे, लेकिन घेंघा रोग के मरीजों को रैफर कर दिया जाता था। इसकी वजह रोग का गले में होना बताया जाता है। मेडिकल कॉलेज तथा जिला अस्पताल की संयुक्त टीम ने शनिवार को दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद यह उपलब्धि हासिल की है।


जानकारी के अनुसार जिले के ग्राम घाट परासिया निवासी रसीला बाई (४२) लम्बे समय से घेंघा रोग से पीडि़त थीं। उन्हें ऑपरेशन के बाद बड़ी राहत मिली है। ऑपरेशन टीम को लीड कर रहे सर्जन डॉ. मनन गोगिया ने बताया कि महिला के गले में थाइराइड काफी बढ़ गया था। यदि समय पर ऑपरेशन नहीं किया जाता तो काफी दिक्कतें हो सकती थीं। हालांकि पूरी तरह राहत मिलना अभी बाकी है, चूंकि गले से निकाली गई १० से १२ फीट की गांठ को भोपाल कैंसर जांच के लिए भेजा जाएगा। जहां की रिपोर्ट के बाद ही अगली प्रोसेस होगी।

सर्जन डॉ. मनन गोगिया, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. नितिन जैन, एनेस्थिशिया विशेषज्ञ डॉ. पी. गोगिया, डॉ. गगन कोहले, डॉ. महेंद्र सोनिया, डॉ. मोना भलावी, स्टाफ नर्स रचना मालवीय आदि टीम में शामिल थे।


हाइरिस्की होता है गले का ऑपरेशन


थाइराइड गले में होने की वजह से ऑपरेशन करना काफी रिस्की होता है। थोड़ी सी चूंक का नतीजा बड़ा हो सकता है। चूंकि गले से सभी तरह की नसें दिमाग में जाती है, थोड़ी सी गलती से मरीज की जान जा सकती है या आवाज बदल सकती है। इसलिए एेसे ऑपरेशन के लिए पहले योजना बनानी पड़ती है। बेहोश करने वाले डॉक्टरों की इसमें अहम भूमिका होती है, क्योकि ऑपरेशन के दौरान मरीज खुद से सांस नहीं ले पाता है उसे मशीन से सांस देनी पड़ती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के बाद ही गले का ऑपरेशन किया जाता है।


आयोडिन की कमी व पत्ता गोभी का सेवन घातक


आमतौर पर घेंघा रोग आयोडिन की कमी तथा अत्याधिक पत्ता गोभी के सेवन से होता है। इसके अलावा यह बीमारी वंसानुगत भी देखने को मिली है। बताया जाता है कि ३० साल तक की थाइराइड का ऑपरेशन नहीं किया गया तो इसमें कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है तथा गले में बनी गांठ मरीज के सांस लेने में तकलीफ उत्पन्न करती है।