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इस बार कपास की बुवाई होगी सबसे ज्यादा

इस साल क्षेत्र में कपास की बोवनी पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड तोडऩे जा रही है। क्षेत्र में करीब 51 हजार हैक्टेयर में खेती की जाती है।अलग -अलग फ सलें बोयी जाती है, लेकिन पिछले साल कपास के भाव 10 से 11 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक जाने की वजह से किसान इस बार कपास में रूचि दिखा रहे हैं। इसका असर सोयाबीन के रकबे पर पडऩे वाला है। पिछले साल कपास लगभग 18 हजार हैक्टेयर में बोई गई थी।इस साल 20 हजार हैक्टेयर में कपास बोए जाने की संभावना है।

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This time cotton will be sown maximum

छिन्दवाड़ा/पांढुर्ना. इस साल क्षेत्र में कपास की बोवनी पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड तोडऩे जा रही है। क्षेत्र के किसानों ने 90 प्रतिशत खेतों में कपास की बोवनी का मन बनाया है। क्षेत्र में करीब 51 हजार हैक्टेयर में खेती की जाती है।अलग -अलग फ सलें बोयी जाती है, लेकिन पिछले साल कपास के भाव 10 से 11 हजार रुपए तक जाने की वजह से किसान इस बार कपास में रूचि दिखा रहे हैं। इसका असर मंगफ ली और सोयाबीन के रकबे पर पडऩे वाला है। पिछले साल कपास लगभग 18 हजार हैक्टेयर में बोई गई थी। वर्ष 2019 -20 में लगभग 15 हजार हैक्टेयर में बोया गया था। कृषि विभाग के अनुसार इस साल 20 हजार हैक्टेयर में कपास बोए जाने की संभावना है। वहीं मंगफ ली पिछले साल 4739 हैक्टेयर में बोई गई थी। इस साल 4300 हैक्टेयर में बोए जाने की संभावना है। इसकी मुख्य वजह मूंगफली की खुदाई कटाई में बढऩे वाली मजदूरी है। इसी तरह सोयाबीन के बीज में सुधार की उम्मीद किसान कर रहे थे । पिछले साल विभाग और बाजार से प्राप्त बीज किसानों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए थे। सोयाबीन के प्रति अभी रुझान कम नजर आ रहा है। किसान इस साल 600 हैक्टेयर में धान बोएंगे, मक्का लगभग 12 हजार हैक्टेयर में बोये जाने की संभावना है। ज्वार 2350 हैक्टेयर उड़द 370 हैक्टेयर, मूंग 400 हैक्टेयर ,अरहर 5 हजार हैक्टेयर व अन्य फ सलें ६ हजार हैक्टेयर में लगाए जाने की संभावना है।कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष सौंसर क्षेत्र में भी कपास की खेती को लेकर रुझान फि र बढ़ा है। बीते 2 वर्षों से कपास की कीमतें बढ़ गई हैं। पिछले वर्ष बाजार में कपास लगभग 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी थी। बीते वर्ष लगभग 33 हजार हैक्टेयर भूमि में कपास की फसल थी। इस वर्ष 40 हजार हैक्टेयर में कपास बुवाई की संभावना है।