
पानी के फव्वारे से एलम मिलाने की प्रक्रिया।
नगर निगम के माध्यम से संचालित हो रहे तीनों फिल्टर प्लांटों में हर दिन लगभग 15 हजार रुपए एलम खपत होती है। बारिश के दिनों में यह खपत दोगुनी भी हो जाती है। फिलहाल पत्रिका में खबर छपने के बाद निगम ने 40 टन एलम मंगवाया, इसके बावजूद बारिश के अनुसार यह नाकाफी है, बारिश पूर्व 200 टन एलम की डिमांड बनी हुई है। फिल्टर प्लांटों में माचागोरा, कंहरगांव डैम एवं कुलबेहरा नदी से रॉ-वाटर की सप्लाई होती है, बारिश नहीं होने के कारण अभी तो रॉ-वाटर साफ है इसलिए एक फिल्टर प्लांट में 20 किलो की एक सिल्ली की खपत एक घंटे में हो रही है। पानी को साफ करने के लिए यह पहला स्तर होता है, जिससे पानी में घुली हुई मिट्टी को लेकर एलम तल में जमा हो जाता है। इसके बाद पानी फिल्टर मीडिया से होते हुए प्लांट के नीचे टैंकों में एकत्र होता है जहां क्लोरीन मिलाई जाती है। पहले स्तर में ही तीनों फिल्टर प्लांटों में 24 घंटे में करीब 5-5 हजार रुपए की एलम की खपत हो रही है।
नगर निगम फिल्टर प्लांटों के लिए जिस एलम की जरूरत हर समय पड़ती है, उसकी दर 10.70 रुपए प्रति किलो है, पिछले दिनों फिल्टर प्लांटों की आपूर्ति के लिए 40 टन एलम आया है, हालांकि इतनी मात्रा से अधिक समय तक आपूर्ति नहीं हो पाएगी। दरअसल तीनों फिल्टर प्लांटों में अलग अलग मात्रा एलम की भेज दी जाती है, फिर जिस प्लांट में एलम कम होता है, दूसरे प्लांट से इसकी आपूर्ति की जाती है। अधिक जरूरत के बाद भी निगम अधिक एलम नहीं मंगवा पाता है। 40 टन एलम के लिए भी निगम को लगभग 4 लाख रुपए चुकाने पड़ चुके हैं। बारिश के लिए निगम 200 टन एलम मंगवाना होगा जिसके लिए 21 लाख रुपए से अधिक खर्च करने पड़ेंगे।
बारिश में मिट्टी को साफ करने के लिए एलम की मात्रा बढ़ाई जाता है। जिससे पानी में अम्लता बढ़ जाती है, जिसमें संतुलन के लिए बड़े टैंक में एलम के साथ चूने को मिलाया जाता है, फिलहाल फिल्टर प्लांटों में चूना उपलब्ध नहीं है, हालांकि फिल्टर प्लांट प्रभारी अभिनव कुमार तिवारी का कहना है कि बारिश होने के साथ ही रॉ-वाटर में अधिक मिट्टी आने लगती है, जिससे एलम अधिक मिलाना पड़ता है, अम्लता को घटाने के लिए चूना मिलाया जाएगा। जल्द ही चूने की खेप फिल्टर प्लांटों में पहुंच जाएगी।
Published on:
20 Jun 2025 11:22 am
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