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रोजी रोटी के लिए बिना पंजीयन ही हम्माली करते हैं हजारों श्रमिक

Kusmeli Mandi

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Kusmeli Mandi

कृषि उपज मंडी कुसमेली में साल के आठ माह दो से ढाई हजार लोग मजदूरी करते हैं। इन्हें आम तौर पर हम्माल कहा जाता है, लेकिन इनमें से ज्यादातर हम्माल नहीं, सिर्फ श्रमिक हैं जो कि दिन भर काम करने के बाद मिलने वाली मजदूरी से अपने घर का खर्च चलाते हैं। इन श्रमिकों को हम्माल का दर्जा मंडी बोर्ड में पंजीयन के बाद मिलता है। पंजीयन के बाद ही ये मंडी से मिलने वाली सहायता राशि के पात्र होते हैं।


कृषि उपज मंडी कुसमेली में करीब सात सौ श्रमिक हम्माल के रूप में पंजीकृत हैं, जो कि मंडी में किसान की उपज के ढेर से लेकर, तौल, आदि करने के बाद लदाई तक करते हैं। यह कार्य इन पंजीकृत हम्मालों के अतिरिक्त अन्य श्रमिक भी करते हैं, जो कि कहीं और मजदूरी नहीं मिलने पर मंडी में काम मिलने की आस में पहुंच जाते हैं। मंडी में काम इतना अधिक होता है कि इन्हें आठ माह तक कहीं और नहीं जाना पड़ता। मंडी में हम्माल सीजन में 300 से 600 रुपए प्रतिदिन तक कमा लेते हैं।

दोनों सीजन में हजारों श्रमिकों की पड़ती है जरूरत

कृषि उपज मंडी कुसमेली में काम करने के लिए अक्टूबर से जनवरी तक खरीफ के सीजन की मुख्य फसल मक्का एवं फरवरी से जून तक रबी की उपज गेहूं की जमकर आवक होती है। अनाज के कामकाज के लिए कदम दर कदम पर हम्माल की जरूरत पड़ती है। किसान की उपज मंडी पहुंचने के बाद उसे गाड़ी से उतारकर पाला खंजर करने के लिए ढेर करने से लेकर उसकी नीलामी के बाद उसे भरने, तौल करने, सिलाई करने एवं उसे व्यापारी के गोदाम या उसके वाहन में लदान करने तक हम्माल ही अपनी भूमिका निभाते हैं।

पंजीयन का खर्च बढ़ा तो रुचि घटी

मंडी में काम करने के लिए हम्माल पंजीयन आवश्यक होता है। जहां पूर्व में साल भर के लिए सिर्फ 20 रुपए में साधारण से एक दस्तावेज में हम्माल का पंजीयन हो जाता था, वहीं अब पंजीयन की प्रक्रिया में कई कई दिन लग जाते हैं। इसके साथ ही 5 साल के लिए करीब 500 रुपए खर्च भी हो रहे हैं। श्रमिकों को उनके पहचान के दस्तावेज सहित, पुलिस सत्यापन अथवा स्वयं का शपथ पत्र तो लगता ही है, साथ ही पंजीयन कियोस्क सेंटर में करवाना होता है। इसमें उनका काफी समय खराब होता है। इस कारण वे पंजीयन से बचते हैं।

मंडी में हम्माली करने के लिए श्रमिकों का पंजीयन आवश्यक है। इसके लिए कई बार घोषणा की जाती है। बढ़ा हुआ शुल्क शासन स्तर पर बढ़ाया गया है, दस्तावेज भी ऑनलाइन जमा होते हैं। पंजीयन के बिना मंडी से मिलने वाली योजना के पात्र श्रमिकों को नहीं माना जा सकता है।
सुरेश कुमार परते, सचिव कृषि उपज मंडी कुसमेली