13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तीन दिन की बारिश से मक्का सहित अन्य फसलें सम्भली

कम नहीं हो रही यूरिया की मांग: किसानों ने कहा-यही हाल रहे तो रबी सीजन में होगी परेशानी, फिलहाल बारिश से मिली राहत

2 min read
Google source verification
soyabean makka ki fasal

लगातार तीन दिन की बारिश से मक्का समेत अन्य फसलों को जीवनदान मिला है। किसान कह रहे हैं कि अभी मक्का में यूरिया की मांग कम नहीं हो पा रही है। यही हाल रहे तो रबी सीजन में गेहूं की फसल में परेशानी जाएगी। पिछले दस दिन से बारिश न होने से मक्का फसल कुम्हलाने लगी थी। पुन बारिश का दौर लौटने से फसल को पुनर्जीवन मिला है। किसानों का कहना है कि जिले में यूरिया की मांग बनी हुई है। लगातार निजी दुकानों और सहकारी समितियों में किसानों की कतार देखी जा रही है। ग्राम झिरलिंगा के किसान नरेश ठाकुर का कहना है कि बारिश से मक्का की फसल थोड़ी पीली पड़ जाती है। यूरिया डालते ही पुन हरी हो जाती है।


कृषि विभाग की ओर से अभी दो बोरी खाद दी जा रही है। ये पर्याप्त नहीं है। किसानों को ज्यादा यूरिया की जरूरत है। इधर, भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष एवं ग्राम चारगांव के किसान रामराव लाड़े ने कहा कि बारिश से मक्का फसल संभल गई है। बारिश अमृत तुल्य है।

1.20 लाख मीट्रिक टन मांग की उम्मीद

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 10 अगस्त तक जिले में मक्का समेत अन्य फसलों में एक लाख 200 मीट्रिक टन यूरिया का उपयोग हो चुका है। आगे भी सीजन में 1.20 लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग पहुंच जाने की आशा है। कृषि अधिकारी राज्य शासन के अधिकारियों से लगातार रेलवे रैक भेजने का मांगपत्र भेज रहे हैं, ताकि किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराई जा सकें।

रबी सीजन में बढ़ सकती है यूरिया की मांग

किसानों का कहना है कि रबी सीजन में जब गेहूं की बोवाई होंगी और रकबा तीन लाख हेक्टेयर से ज्यादा होगा, तब यूरिया की मांग एक लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो सकती है। अभी खरीफ सीजन में यूरिया की किल्लत जा रही है, तब रबी सीजन में गेहूं में भी ये परेशानी जा सकती है।