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जमाखोरी रोकने व्यापारियों की स्टॉक लिमिट,फिर भी गेहूं के कम नहीं हो रहे दाम

-नई फसल आने में पांच माह का समय, आटा 40 रुपए किलो पर उपलब्ध

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छिंदवाड़ा.केन्द्र और राज्य सरकार ने गेहूं की जमा खोरी थोक व्यापारियों की स्टॉक लिमिट तय की और इसकी निगरानी के अधिकार भी सौंपे। फिर भी गेहूं के दाम बाजार में कम नहीं हो पा रहे है। अभी नई फसल आने में पांच माह का समय है। तब तक आम आदमी को इस अनाज की महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
इस समय कुसमैली कृषि उपज मंडी में गेहूं का न्यूनतम भाव 2800 रुपए प्रति क्विंटल है। इससे चिल्हर बाजार में इस गेहूं की कीमत 3200 रुपए प्रति क्विंटल हो जाती है। इससे अधिक अच्छा क्वालिटी के शरबती समेत अन्य ब्रांड का गेहूं के दाम थोक में 3000-3500 रुपए प्रति क्विंटल है। इससे चिल्हर बाजार में इसकी कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है। गेहूं की जमाखोरी रोकने सरकार ने थोक व्यापारियों की स्टॉक लिमिट 10 हजार क्विंटल निर्धारित की और चिल्हर व्यापारियों की स्टॉक सीमा 50 क्विंटल रखी। इसके अलावा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को गोदामों का निरीक्षण कर स्टॉक लिमिट की जांच करने के भी अधिकार दिए। देखने में आया है कि इस विभाग के अधिकारियों ने शायद ही कभी गेहूं के गोदामों की जांच की । अब तक उन्होंने इसकी रिपोर्ट भी कभी आम जनता के सामने नहीं रखा। छिंदवाड़ा में किस व्यापारी के पास कितना गेहूं उपलब्ध है। प्रशासन ने भी कभी इसकी जानकारी समय सीमा की बैठक में नहीं ली। इसका नतीजा यह है कि
जमाखोरी की वजह से गेहूं महंगा हो रहा है या नहीं। इस बारे में जानकारी नहीं मिल रही है। अगर सरकार की सख्ती है तो गेहूं के रेट बाजार में कम क्यों नहीं हो पा रहे हैं। आटा आज भी 40 रुपए किलो हो रहा है।
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इतना गेहूं कर सकते हैं स्टोर
थोक व्यापारी-10000 क्विंटल
खुदरा व्यापारी 50 क्विंटल
मिलर मासिक क्षमता का 50 प्रतिशत
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नई फसल आने में है पांच महीने का समय
व्यापारियों ने रबी का सीजन खत्म होने पर अपै्रल-मई में गेहूं की खरीद करके वेयर हाउस में रख दिया था। किसान का गेहूं बिकने आया था, जब पेडू के रेट 2200 से 2300 रुपए क्विंटल थे। आटा बनाने वाली फर्मों के पास भी गेहूं स्टॉक रखा हुआ है। जमा खोरी से मांग-आपूर्ति में अंतर आ रहा है। व्यापारी भारत सरकार के पोर्टल पर स्टॉक अपलोड कर खुश है। इसकी मैदानी जांच नहीं हो पा रही है।
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इनका कहना है…
सरकार की ओर से गेहूं के थोक और चिल्हर व्यापारियों की स्टॉक लिमिट तय की गई है। जमाखोरी रोकने के प्रयास विभागीय स्तर पर किए जा रहे हैं।
-अजीत कुजूर, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी
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