
बाजार में मिल रही समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत
मंतोष कुमार सिंह
छिंदवाड़ा. लघु वनोपज का समर्थन मूल्य पिछले एक साल से नहीं बढ़ पाया है। इसके चलते जिले में मौजूद चार वन धन केंद्र और 24 अपनी दुकानें आंवला, हर्रा, महुआ लेकर आने वाले वनवासियों का इंतजार कर रहीं हैं। वनवासी परम्परागत ढंग से बिचौलियों को वनोपज दे रहे हैं। हालांकि वन विभाग का दावा है कि ऐसा बाजार मूल्य अधिक होने के कारण हो रहा है। बाजार में व्यापारी वनवासियों को समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत दे रहे हैं।
लघु वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य
वन धन योजना के तहत लघु वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया। आचार गुठली 130, पलास लाख 200, कुसुम लाख 275, हर्रा 20, बहेड़ा 25, बेलगूदा 30, बकोड़ा बीज 20, शहद 225, महुआ फूल 35, महुआ बीज 35, करंज बीज 40, नीम बीज 30, साल बीज 20, नागरमोथा 35, जामुन बीज 42, आंवला गूदा 52, भिलामा 9, अनंत मूल 35, अमलतास बीज 13, अर्जुन छाल 21, गिलोय 40, कींच बीज 21, कालमेघ 35, बायबिडंग बीज 94, धवई फूल 37, वन तुलसी पत्तियां 22, कुटज 31, मकोय 24, अपंग पौधा 28, इमली बीज सहित 36, सतावरी की सूखी जड़ 107 और गुड़मार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 41 रुपए प्रतिकिलो तय किया गया है।
बाजार में मिल रही अच्छी कीमत
लघु वनोपाज- समर्थन मूल्य- बाजार मूल्य
आचार गुठली- 130- 250
कुसुम लाख- 275- 300
हर्रा छाल- 20- 40
बहेड़ा -25 -35
शहद -225- 350
आंवला -52- 130
भिलामा -09- 20
गुड़मार -41 -100
महुआ बीज -35 -70
(कीमत रुपए प्रति किलो)
वन औषधीय प्रसंस्करण केंद्र बंद
भरतादेव में स्थित पातालकोट औषधीय प्रसंस्करण केंद्र बंद पड़ा हुआ है। पांच साल से प्रसंस्करण केंद्र को शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। प्लांट बंद होने की वजह से यह लगाई गई करोड़ों रुपए की मशीनें खराब हो रहीं हंै। दो बार निकाली गईं टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई है, जिसकी वजह से इंतजार बढ़ता जा रहा है।
अपरोक्ष लाभ हुआ
वन धन योजना में बनाए गए चार केंद्रों की स्थापना से वनवासियों को अपरोक्ष लाभ हुआ है। इससे उनकी वनोपज अब समर्थन मूल्य से नीचे नहीं बिक रही है।
- केके भारद्वाज, सीसीएफ छिंदवाड़ा
Published on:
04 Feb 2022 07:01 pm
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