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वास्तुदेव के पुत्र थे भगवान विश्वकर्मा, जानिए इनके 108 नाम

शहर में आज विश्वकर्मा जयंती बडे ही धूमधाम से मनाई जा रही है। वहीं बढ़ई समाज द्वारा शहर में विश्वकर्मा मंदिर में ढेरों आयोजन किए जा रहे है।

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Prashant Sahare

Sep 17, 2016

chhindwara

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छिंदवाड़ा। शहर में आज विश्वकर्मा जयंती बडे ही धूमधाम से मनाई जा रही है। वहीं बढ़ई समाज द्वारा शहर में विश्वकर्मा मंदिर में ढेरों आयोजन किए जा रहे है। इतना ही नहीं समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सांसद कमलनाथ भी शामिल हुए है। हिन्दुओं के अनुसार पौराणिक काल में विशाल भवनों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा करते थे। यह मंदिर देवी-देवताओं,राजा-महाराजाओं द्वारा बनवाए जाते थे। सोने की लंका के अलावा विश्वकर्मा जी ने ऐसे कई भवनों का निर्णाण किया था। जो उस समय वास्तु, स्थापत्य और सुंदरता में अद्वितीय माने जाते थे। कहा जाता है कि भगवान शिवकर्मा को इतना अनुभव था कि वे अपनी कार्य शक्ति से पानी में चलने वाला खड़ाऊ भी बना सकते थे।

सृजन के देवता 'विश्वकर्मा, वास्तुदेव के पुत्र थे और उनकी माता का नाम अंगिरसी था। विश्वकर्मा जी ने इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी और शिवमण्डलपुरी का निर्माण किया था। भारतीय परम्पराओं में भगवान विश्वकर्मा की पूजा और यज्ञ संपूर्ण वधि-विधान से किया जाता है। उन्हें यंत्रों का देवता माना जाता है। मान्यता के अनुसार इनके 108 नामों का पाठ करना बहुत लाभदायी होता है।


यह हैं श्री विश्वकर्मा भगवान के 108 नाम...
1. ऊँ विश्वकर्मणे नम:, 2. ऊँ विश्वात्मने नम:, 3. ऊँ विश्वस्माय नम:, 4. ऊँ विश्वधाराय नम:, 5. ऊँ विश्वधर्माय नम:, 6. ऊँ विरजे नम:, 7. ऊँ विश्वेक्ष्वराय नम:, 8. ऊँ विष्णवे नम:, 9. ऊँ विश्वधराय नम:, 10. ऊँ विश्वकराय नम:, 11. ऊँ वास्तोष्पतये नम:, 12. ऊँ विश्वभंराय नम:, 13. ऊँ वर्मिणे नम:, 14. ऊँ वरदाय नम:, 15. ऊँ विश्वेशाधिपतये नम:, 16. ऊँ वितलाय नम:, 17. ऊँ विशभुंजाय नम:, 18. ऊँ विश्वव्यापिने नम:, 19. ऊँ देवाय नम:, 20. ऊँ धार्मिणे नम:, 21. ऊँ धीराय नम:, 22. ऊँ धराय नम:, 23. ऊँ परात्मने नम:, 24. ऊँ पुरुषाय नम:, 25. ऊँ धर्मात्मने नम:, 26. ऊँ श्वेतांगाय नम:, 27. ऊँ श्वेतवस्त्राय नम:, 28. ऊँ हंसवाहनाय नम:, 29. ऊँ त्रिगुणात्मने नम:, 30. ऊँ सत्यात्मने नम:, 31. ऊँ गुणवल्लभाय नम:, 32. ऊँ भूकल्पाय नम:, 33. ऊँ भूलेंकाय नम:, 34. ऊँ भुवलेकाय नम:, 35. ऊँ चतुर्भुजय नम:, 36. ऊँ विश्वरुपाय नम:, 37. ऊँ विश्वव्यापक नम:, 38. ऊँ अनन्ताय नम:, 39. ऊँ अन्ताय नम:, 40. ऊँ आह्माने नम:, 41. ऊँ अतलाय नम:, 42. ऊँ आघ्रात्मने नम:, 43. ऊँ अनन्तमुखाय नम:, 44. ऊँ अनन्तभूजाय नम:, 45. ऊँ अनन्तयक्षुय नम:, 46. ऊँ अनन्तकल्पाय नम:, 47. ऊँ अनन्तशक्तिभूते नम:, 48. ऊँ अतिसूक्ष्माय नम:, 49. ऊँ त्रिनेत्राय नम:, 50. ऊँ कंबीघराय नम:, 51. ऊँ ज्ञानमुद्राय नम:, 52. ऊँ सूत्रात्मने नम:, 53. ऊँ सूत्रधराय नम:, 54. ऊँ महलोकाय नम:, 55. ऊँ जनलोकाय नम:, 56. ऊँ तषोलोकाय नम:, 57. ऊँ सत्यकोकाय नम:, 58. ऊँ सुतलाय नम:, 59. ऊँ सलातलाय नम:, 60. ऊँ महातलाय नम:, 61. ऊँ रसातलाय नम:, 62. ऊँ पातालाय नम:, 63. ऊँ मनुषपिणे नम:, 64. ऊँ त्वष्टे नम:, 65. ऊँ देवज्ञाय नम:, 66. ऊँ पूर्णप्रभाय नम:, 67. ऊँ ह्रदयवासिने नम:, 68. ऊँ दुष्टदमनाथ नम:, 69. ऊँ देवधराय नम:, 70. ऊँ स्थिर कराय नम:,71. ऊँ वासपात्रे नम:,72. ऊँ पूणार्नंदाय नम:,73. ऊँ सानन्दाय नम:,74. ऊँ सर्वेश्वरांय नम:,75. ऊँ परमेश्वराय नम:,76. ऊँ तेजात्मने नम:,77. ऊँ परमात्मने नम:,78. ऊँ कृतिपतये नम:,79. ऊँ बृहद् स्मणय नम:,80. ऊँ ब्रह्मांडाय नम:,81. ऊँ भुवनपतये नम:,82. ऊँ त्रिभुवनाथ नम:, 83. ऊँ सतातनाथ नम:,84. ऊँ सर्वादये नम:,85. ऊँ कषापज़य नम:, 86. ऊँ हर्षाय नम:, 87. ऊँ सुखकत्रे नम:, 88. ऊँ दुखहत्र्रे नम:, 89. ऊँ निर्विकल्पाय नम:, 90. ऊँ निर्विधाय नम:, 91. ऊँ निस्माय नम:, 92. ऊँ निराधाराय नम:, 93. ऊँ निकाकाराय नम:, 94. ऊँ महदुर्लभाय नम:, 95. ऊँ निमोहाय नम:, 96. ऊँ शांतिमुर्तय नम:, 97. ऊँ शांतिदात्रे नम:, 98. ऊँ मोक्षदात्रे नम:, 99. ऊँ स्थवीराय नम:, 100. ऊँ सूक्ष्माय नम:, 101. ऊँ निर्मोहय नम:, 102. ऊँ धराधराय नम:, 103. ऊँ स्थूतिस्माय नम:, 104. ऊँ विश्वरक्षकाय नम:, 105. ऊँ दुर्लभाय नम:, 106. ऊँ स्वर्गलोकाय नम:, 107. ऊँ पंचवकत्राय नम:, 108. ऊँ विश्वलल्लभाय नम:।