
छिंदवाड़ा. बाजार में सिंघाड़े की खूब आवक हो रही है। सिंघाड़ा जितना स्वादिष्ट खाने में लगता है, उससे कई गुना अधिक इसके चिकित्सकीय और औषधीय गुण हंै। आयुर्वेद के ग्रंथों में सिंघाड़ा पानीफल, जलफल, त्रिकोण फल आदि नामों से जाना जाता है। यह सामान्य रूप से तालाबों के अलावा जलाशयों में पाई जाने वाली लता का एक फल है। सिंघाड़ा के ऊपर एक कठोर आवरण रहता। आयुर्वेद आचार्यों के मतानुसार सिंघाड़ा में गुरु, शीत गुण के साथ कसैला रस होता है। यह वीर्यवर्धक, मल निरोधक, वात रोग कम करने वाला, रक्तवर्धक आदि गुणों से भरपूर होता है।
बीमारियों में लाभदायक
सिंघाड़े में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह विटामिन ए, विटामिन सी, सिट्रिक एसिड, फास्फोरस सोडियम, मैगनीज, फाइबर, आयोडीन, मैग्नीशियम आदि से भरपूर होता है। सामान्य दुर्बलता में सिंघाड़ा सरल, सुलभ और अच्छी औषधि है। लो ब्लड प्रेशर या बीपी का कम हो जाना एक इमरजेंसी कंडीशन होती है। इस स्थिति में सिंघाड़े का चूर्ण, आयुर्वेदिक औषधि सिद्ध मकरध्वज, कॉफी, नमक का पानी के साथ प्रयोग करना बहुत उपयोगी होता है, क्योंकि सिंघाड़े में सोडियम फास्फोरस आदि पाए जाते हैं। ट्यूबरक्लोसिस या तपेदिक की बीमारी, खांसी व दर्द के लिए सिंघाड़े को त्रिफला, पिपली, नागरमोथा, गुड़ और मधु के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। बार-बार गला सूखना या प्यास लगने की बीमारी में सिंघाड़े के चूर्ण के साथ कमल, सेमल, कशेरू की जड़ और गन्ना से बने क्वाथ का प्रयोग करने से राहत मिलती है।
दस्त, रक्तस्राव, बवासीर में रामबाण
दस्त से राहत के लिए सिंघाड़ा, इमली के बीज का चूर्ण को चावल के पानी या चावल की धोवन के साथ सेवन करने पर लाभ मिलता है। गर्भिणी के रक्तस्राव में या रक्तस्राव की स्थिति में कमलगट्टे के साथ सिंघाड़े का प्रयोग किया जाता है। साथ ही सातवें महीने में गर्भवती महिलाओं के रक्तस्राव होने पर सिंघाड़े को किसमिस, कशेरुक, मुलेठी, कमल के फूल का काढ़ा के साथ मिलाकर प्रयोग करने पर लाभ मिलता है। अर्श या खूनी बवासीर में रक्तस्राव को रोकने के लिए सिंघाड़े के साथ अन्य औषधि जैसे नागर मोथा, नागकेसर, फिटकरी आदि भस्म के साथ प्रयोग किया जाता है। इनफर्टिलिटी या स्पर्म काउंट को बढ़ाने के लिए सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाकर या सिंघाड़े का चूर्ण 5 से 10 ग्राम दूध में मिलाकर सेवन करना चाहिए।
थायराइड व त्वचा रोगों के लिए उपयोगी
त्वचा रोगों में शरीर की त्वचा को सामान्य करने तथा उसकी टोन अप को मेंटेन रखने के लिए, झुरियां खत्म करने के लिए सिंघाड़े का चूर्ण बहुत उपयोगी होता है। आजकल हाइपोथाइरॉएडिज्म या थायराइड की समस्या बहुत ही सामान्य है। इसका इलाज आयुर्वेद की अन्य औषधि जैसे कांचनार, गूगल आदि के साथ सिंघाड़े की भस्म का प्रयोग अत्यंत उपयोगी होता है। सिंघाड़े में कैल्शियम, आयरन, फाइबर पर्याप्त होता है। सामान्य लोगों को चूर्ण बनाकर प्रतिदिन प्रयोग होने वाले आटे में 1/10वां भाग मिलाकर देना चाहिए।
Published on:
21 Dec 2022 07:11 pm
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