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दुर्दशा पर आंसू बहा रहा जल संसाधन विभाग का रेस्ट हाउस

नगर से करीब 9 किमी दूर वाघ्यानाला जलाशय को चार चांद लगाने वाला विश्राम गृह अपनी दुर्दशा पर अब आंसू बहाते नजर आ रहा है।

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दुर्दशा पर आंसू बहा रहा जल संसाधन विभाग का रेस्ट हाउस

दुर्दशा पर आंसू बहा रहा जल संसाधन विभाग का रेस्ट हाउस

सौंसर. नगर से करीब 9 किमी दूर वाघ्यानाला जलाशय को चार चांद लगाने वाला विश्राम गृह अपनी दुर्दशा पर अब आंसू बहाते नजर आ रहा है।
जलाशय का सुरम्य नजारा जिसके दीदार करने पूरे क्षेत्र से लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचते है और खास कर उच्च अधिकारियों के लिए मानो यहां सुकून मिलता था, विभाग के जिम्मेदार की लापरवाही व मेंटेनेंस के अभाव में अब यह रेस्ट हाउस खंडहर में तब्दील हो चुका है। अब यह असामाजिक तत्वों अड्डा बन गया है।
वाघ्यानाला परिसर की पहाड़ी पर बना यह रेस्ट हाउस जल संसाधन विभाग के अंतर्गत आता है, जहां विभाग के उच्च अधिकारियों में इसका मेंटेनेस न करवाना और इसे सुव्यवस्थित न रख पाना, विभागीय लापरवाही दर्शा रहा है। विभाग इस जलाशय से सैकड़ों किसानों को पानी देता है, मौसमी फसलों के साथ, फलदार पौधों को पानी देने वाला एकमात्र जलाशय है। इस जलाशय पर मत्स्यपालन भी होता है, और इस जलाशय का नाम सुंदर व सुरम्य वातावरण के लिए पूरे क्षेत्र में मशहूर है।
वाघ्यानाला जलाशय पर पर्यटन की संभावना
गौरतलब है कि रेस्ट हाउस खंडहर में तब्दील होने से अब यहां न केवल उच्च अधिकारियों के सुकून छीन गया है, अपितु अब आम आदमी भी यहां आने से कतराने लगे है। वाघ्यानाला जलाशय परिसर में आने वाले आगुंतकों का कहना है कि जलाशय के परिसर और खंडहर बन चुके विश्राम गृह को नए सिरे से निर्मित किया जाना चाहिए। पहाडिय़ों के बीच वाघ्यानाला जलाशय परिसर के सुरम्य सौंदर्य और बेहतरीन वातावरण को पर्यटन जैसा बनाया जा सकता है।