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पानी रे पानी…गांव से ढाई किमी दूर दूधी नदी,वहां से पानी लाने में फूलती है सांसें

-कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे ग्राम मालनीढोरनी पचगोल के भारिया आदिवासी, कहा-पानी के साथ दो सडक़

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तामिया विकासखण्ड के पातालकोट अंचल की ग्राम पंचायत हर्राकछार के ग्राम मालनीढोरनी पचगोल की महिलाएं एवं पुरुष इस गर्मी में अपने गांव से ढाई किमी दूर दूधी नदी का पानी लाते हैं, तब उनकी प्यास बुझ पाती है। इसे लाने में तीन घंटे का समय लगता है। इस समस्या के बारे में कई बार प्रशासन को अवगत करा चुके हैं लेकिन अब तक उनके गांव में पेयजल समस्या का निराकरण नहीं हुआ है।


ये शिकायत लेकर ग्रामीणों का दल मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचा। उन्होंने बताया कि उनके गांव में 40 मकान है, उसमें करीब 250 लोग रहते हैं। उनके घरों की महिलाएं सुबह से ही पानी लेने निकल पड़ती है। दूधी नदी का पानी लेकर तीन घंटे में लौटती है। यह समस्या हर गर्मी में बनती है। गांव में पेयजल का दूसरा स्त्रोत नहीं है। जिस पर प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिया गया है।

गांव तक कच्ची सडक़ में फंस जाती है गर्भवती महिलाएं

इस गांव की दूसरी समस्या सडक़ है, जिसे चाखला रोड से ग्राम मालनीढोरनी तक नहीं बनाया गया है। इस कच्ची सडक़ में पत्थर भी आ गए हैं। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। ये सडक़ 7.50 किमी है।

पिछले मंगलवार को आए थे सेहरा पचगोल के लोग

पिछले मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में इस पंचायत हर्राकछार के दूसरे टोले सेहरा पचगोल के लोग आए थे। उन्होंने भी पेयजल समस्या होने की जानकारी दी थी। इस गांव के मोहन भारती समेत अन्य ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पचगोल में करीब 250 घरों की बस्ती है। लोग पेयजल का कोई साधन न होने पर दूरदराज से नदी का पानी एकत्र कर उसे लाते हैं। हैंडपंप और नल-जल योजना समेत अन्य संसाधन विकसित करने की मांग कई बार पीएचई विभाग एवं कलेक्टर से की जा चुकी है। अब तक नल जल योजना के तहत ग्राम में पीने के पानी की व्यवस्था का इंतजाम नहीं किया गया है।
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