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छिंदवाड़ा . राजस्व विभाग के अधीन जमीन की भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका के लिए अब तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह पावती अब लोकसेवा केंद्र में आवेदन करने के उपरांत ही जारी की जाएगी। इस सम्बंध में राजस्व विभाग के अवर सचिव ने कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को सख्त आदेश जारी किए हैं।
हाल ही में प्रदेश सरकार की समीक्षा में आया था कि ग्रामीण इलाकों के लोग राजस्व विभाग की सेवाओं से सर्वाधिक त्रस्त हंै। उन्हें बंटवारा, नामांतरण और ऋण पुस्तिका बनाने के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके चलते सरकार की छवि पर असर पड़ता है। इसे देखते राजस्व विभाग द्वारा पहले से ही लोकसेवा गारंटी एक्ट में शामिल अपनी भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका की सेवा के प्रावधान के पालन को सख्त किया गया है।
पहले यह सुविधा थी कि उसे तहसील कार्यालय से भी प्राप्त किया जा सकता था। अब यह व्यवस्था समाप्त करते हुए उसे सीधे लोकसेवा केंद्र की खिडक़ी से जोड़ दिया गया है। भू-अभिलेख अधीक्षक ललित ग्वालवंशी ने बताया कि भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका के जारी होने के सम्बंध में अवर सचिव द्वारा जारी आदेश को सभी तहसीलदारों को भेज दिया गया है। अब ये पुस्तिका तहसील कार्यालय नहीं बल्कि लोकसेवा केंद्र के माध्यम से ही मिलेगी। लगाने
यह है आवेदन करने की प्रक्रिया
इस ऋण पुस्तिका के लिए आवेदन लोक सेवा गारंटी एक्ट के तहत तहसील कार्यालय या लोकसेवा केन्द्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद तहसीलदार अपने राजस्व निरीक्षक या पटवारी को तीन दिवस में ऋण पुस्तिका तैयार करने के लिए भेजेगा। उसके बाद ये पदाधिकारी तमाम प्रक्रिया करने के बाद सात दिन के अंदर उसे तहसीलदार के पास प्रस्तुत करेंगे। जिसे तहसीलदार प्रमाणित करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया १५ दिन में होगी। लोकसेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करते समय ३० रुपए का शुल्क रखा गया है।
Published on:
14 Aug 2017 05:28 pm
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