21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस..कोदो-कुटकी के उत्पादन से खुलेंगे समृद्धि के द्वार

मिलेट वर्ष में बिस्किुट, कुकीज, चाकोली समेत अन्य उत्पाद प्रोत्साहित करने से बाजार में बढ़ी मांग

2 min read
Google source verification
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस..कोदो-कुटकी के उत्पादन से खुलेंगे समृद्धि के द्वार

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस..कोदो-कुटकी के उत्पादन से खुलेंगे समृद्धि के द्वार

छिंदवाड़ा.समाज में खान-पान का टेस्ट फिर से परंपरागत पोषक अनाज कोदो-कुटकी, रागी, सवां, ज्वार-बाजरा और प्रसंस्करित उत्पाद पर लौटने लगा है। बाजार की मांग को देखते हुए इसकी व्यवसायिक खेती का दबाव अधिक है। ऐसे में कृषि विभाग को नई तकनीक का प्रयोग कर इसका रकबा बढ़ाना होगा और सरकार से समर्थन मूल्य तय करवाना होगा। तभी किसानों की समृद्धि के द्वार खुल पाएंगे। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 7 जून को इस लक्ष्य को साधने का संकल्प पूरे जिले को लेना होगा।
इस साल 2023 को मिलेट वर्ष घोषित करने के बाद पोषक मोटे अनाज के व्यंजन और उत्पाद सरकारी कार्यक्रम और आंगनबाड़ी केन्द्रों के भोज के अनिवार्य अंग हो गए हैं। प्रचार-प्रसार होने से समाज में भी इसका टेस्ट लेने की होड़ लग गई है। शहर के मिष्ठान प्रतिष्ठान, स्व-सहायता समूह से लेकर बड़ी कंपनियां मिलेट बिस्किट, कुकीज, चाकोली समेत अन्य उत्पादों को बाजार में उतार रही है। इससे इन अनाज की मांग में पहले की अपेक्षा दुगनी बढ़ोत्तरी हुई है। इसका उत्पादन सीमित होने से बाजार की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।
.....
आदिवासियों के हाथों पर निर्भर उत्पादन
जिले की करीब 23 लाख आबादी में 37 फीसदी 8.50 लाख आदिवासी है। तामिया, जुन्नारदेव, बिछुआ, अमरवाड़ा, हर्रई, परासिया और पांढुर्ना में निवासरत ये लोग सदियों से कोदो कुटकी, जगनी समेत अन्य अनाज और सब्जियां बिना रासायनिक खाद के उत्पन्न कर रहे हैं। वर्तमान में कोदो, कुटकी, सांवा, रागी की खेती 24750 हैक्टेयर में हो रही है तो सामान्य इलाकों में ज्वार और बाजरा का रकबा 8825 हैक्टेयर तक सीमित है। शिवराज सरकार ने इन अनाज के उत्पादन में वृद्धि के लिए बीज समेत अन्य प्रोत्साहन देने की घोषणाएं की है। फिर भी आदिवासी समेत अन्य किसानों को इसके लिए जागृत करने की जरूरत है।
......
समर्थन मूल्य न होना भी व्यवसायिक खेती में बाधा
गेहूं, चावल, ज्वार-बाजरा का समर्थन मूल्य होने से किसान इसके उत्पादन के प्रति उत्साहित रहे हैं। कोदो-कुटकी का समर्थन मूल्य सरकार तय नहीं कर पाई है। इसके उत्पादक आदिवासी फसल आने पर 30-40 रुपए किलो में ये उपज व्यापारियों को बेच देते हैं। फिर ये प्रोसोसिंग होकर बाजार में चमक नए दाम 100-150 रुपए किलो तक पहुंच जाती है। इससे वास्तविक आदिवासी को लाभ नहीं मिल पाता। इससे वे इसका उत्पादन बढ़ा नहीं पा रहे हैं।
.....
खरीफ सीजन में 48 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य
ं पोषक अनाज को प्रोत्साहन दिए जाने और आंगनबाड़ी, स्कूल और सरकारी भोज का अंग बनने से कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में इसका लक्ष्य पिछले साल 2022 के मुकाबले बढ़ा दिया है। अब इसका लक्ष्य 48150 हैक्टेयर कर दिया है।
.....
पोषक अनाज का रकबा का लक्ष्य हेक्टेयर में
अनाज 2022 2023
कोदो 5200 12000
कुटकी 9400 19000
सांवा 1200 1800
रागी 125 250
ज्वार 8800 15000
बाजरा 25 100
कुल 24750 48150
.....
इनका कहना है...
मिलेट वर्ष 2023 में कृषि विभाग ने आदिवासी अंचल की कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा समेत अन्य फसलों का लक्ष्य दोगुना कर दिया है। इसके उत्पादन से हम बाजार की मांग को पूरा करेंगे। इसके साथ ही किसानों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि।
..