
हसीन वादियों में होटल रेस्टोरेंट से गुलजार होगी देवांगना हवाई पट्टी जमीन चिन्हीकरण का काम शुरू
चित्रकूट: उड़न खटोलों को अपनी आगोश में लेने को आतुर देवांगना हवाई पट्टी हसीन वादियों में होटल व रेस्टोरेंट से भी गुलजार होगी. यात्रियों को पहाड़ों व जंगलों के बीच होटल्स की बालकनी से प्रकृति का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलेगा. रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत जनपद को हवाई मार्ग आए जोड़ने की मंजूरी मिलने के बाद देवांगना हवाई पट्टी पर निर्माण कार्य और तेज कर दिया गया है. होटल व रेस्टोरेंट के लिए जमीन के चिन्हीकरण का काम भी शुरू हो चुका है. डीएम शेषमणि पांडेय ने खुद इलाके का भ्रमण कर लोकेशन का मुआयना किया.
वह दिन दूर नहीं जब भगवान राम की तपोभूमि पर भी यात्री विमानों की लैंडिंग शुरू हो जाएगी. रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत जिले की देवांगना हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का काम शुरू है. पड़ोसी जनपद प्रयागराज कानपुर और वाराणसी से जिले के हवाई मार्ग को जोड़ा जाएगा. चूंकि अब केंद्र सरकार से भी हवाई उड़ान को मंजूरी मिल चुकी है इसलिए जिला प्रशासन भी संजीदा हो गया है. इलाके में होटल व रेस्टोरेंट के लिए जमीन के चिन्हीकरण का काम शुरू हो गया है. डीएम शेषमणि पांडेय ने मातहतों के साथ क्षेत्र के उन संभावित इलाकों का भ्रमण किया जहां होटल आदि के लिए जगह मुफीद साबित हो सकती है. डीएम ने हवाई पट्टी पर चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लेते हुए तेजी लाने के निर्देश दिए.
राज्य का ये शायद पहला एयरपोर्ट होगा जो प्रकृति के अनुपम सौंदर्य की गोद में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों में रोमांच उत्पन्न कर देगा. ऊंचे पहाड़ व घने जंगलों बीहड़ों और टेढ़े मेढ़े पहाड़ी रास्तों के बीच स्थित इस एयरपोर्ट को अभी "देवांगना हवाई पट्टी" के नाम से जाना जाता है.
जनपद मुख्यालय से करीब साढ़े चार किलोमीटर दूर ऊंचे पहाड़ घने जंगलों बीहड़ों के बीच स्थित है देवांगना हवाई पट्टी. चारों तरफ घने जंगल पहाड़ी घाटियां और ऊंचाई से नज़र आती प्राकृतिक वादियां निश्चित रूप से हवाई यात्रियों को अपने मोहपाश में बांधने के लिए काफी हैं. पर्यटन की दृष्टि से तो ये हवाई पट्टी सिर्फ जिले के लिए ही नहीं बल्कि बुन्देलखण्ड के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी.
देवांगना हवाई पट्टी का निर्माण सन 2013 में तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ था. लगभग 92 करोड़ की लागत से बनने वाली हवाई पट्टी का काम सन 2017 में वन विभाग व पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी न मिलने से रुक गया था. जिस पर तत्कालीन डीएम विशाख जी अय्यर के प्रयासों से सम्बंधित विभाग द्वारा एनओसी मिल सकी और निर्माण कार्य आगे बढ़ सका. इसके बाद वर्तमान प्रदेश सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया. इसके तहत प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी ने लगभग 100 करोड़ का बजट देने की घोषणा की और फिर हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का कार्य और तेजी से चला. अब यहां यात्री विमानों के आवागमन का सभी को बेसब्री से इंतजार है.
Published on:
17 Sept 2020 02:04 pm
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