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विकास नहीं, जातीय समीकरण पलटेगा प्रत्याशियों का भाग्य

ग्राउंड रिपोर्ट : बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट

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विकास नहीं, जातीय समीकरण पलटेगा प्रत्याशियों का भाग्य

विवेक मिश्रा
चित्रकूट. कभी लोकसभा व विधानसभा चुनाव में खूंखार डकैतों के फरमानों पर लोकतंत्र के मंदिर में अपना प्रतिनिधि भेजने वाली बुन्देलखण्ड की महत्वपूर्ण चित्रकूट-बांदा लोकसभा सीट पर हमेशा से जातीय समीकरण ही हावी रहा है। विकास की बातें मुद्दे व बुनियादी समस्याएं यहां की जातीय गुणा गणित की परछाई में गुम सी हो जाती हैं।

सपा-बसपा गठबंधन से श्यामाचरण गुप्त मैदान में

सन 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा का दामन छोड़ भगवा चोला ओढ़ने वाले बड़े उद्योगपति श्यामाचरण गुप्त ने इस लोकसभा चुनाव (2019) में फिर एक बार सपा का सहारा लिया है और पार्टी ने उन्हें चित्रकूट-बांदा संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया है। श्यामाचरण गुप्त के सपा व भाजपा से पुराने रिश्ते रहे हैं। सन 2014 में भाजपा ने उन्हें इलाहाबाद संसदीय सीट से टिकट दिया था और उन्हें विजय श्री हासिल हुई थी। इससे पहले सन 2004 में सपा के टिकट पर श्यामाचरण ने चित्रकूट-बांदा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें विजयश्री हासिल हुई थी।

कांग्रेस ने दस्यु ददुआ के पूर्व सांसद भाई को मैदान में उतारा

कांग्रेस ने इस बार कुख्यात दस्यु सरगना रहे शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ के पूर्व सांसद भाई बालकुमार पटेल को चित्रकूट-बांदा संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया है। बालकुमार पटेल ने सबसे पहले सन 2002 में इलाहाबाद की करछना विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायकी का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। उसके बाद सन 2007 में बसपा का दामन छोड़ सपा का दामन पकड़ा और प्रतापगढ़ की पट्टी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद सन 2009 में सपा से टिकट पाकर बालकुमार मिर्जापुर से सांसद बने विजयी होकर। सन 2014 में सपा से पुनः उन्हें बांदा लोकसभा सीट से टिकट मिला लेकिन हार का सामना करना पड़ा। अब 2019 के लोकसभा चुनाव में बालकुमार ने सपा छोड़ कांग्रेस के पाले में इंट्री कर ली जिसपर पार्टी ने उन्हें इनाम देते हुए प्रत्याशी घोषित कर दिया है।

भाजपा में माथा पच्ची लेकिन जल्द होगी घोषणा

इन सबके इतर यूपी व केंद्र में सत्तासीन भाजपा ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि बुन्देलखण्ड की हमीरपुर-महोबा व जालौन सीट पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई है लेकिन चित्रकूट-बांदा सीट पर देरी राजनीतिक पंडितों को भी समझ में नहीं आ रही। पार्टी जिलाध्यक्ष व चित्रकूट सदर से विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि जल्द ही पार्टी हाईकमान की ओर से प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी। दावेदारों की लंबी फेहरिस्त को लेकर जिलाध्यक्ष का कहना था कि किसे टिकट देना है या नहीं ये हाईकमान का निर्णय होता है उन्हें इससे ज्यादा और कुछ नहीं मालूम लेकिन उम्मीद है कि जल्द उनकी पार्टी भी अपने प्रत्याशी को मैदान में उतार देगी।

संसदीय सीट की जमीनी तस्वीर

चित्रकूट-बांदा लोकसभा सीट की यदि जमीनी तस्वीर देखी जाए तो इसमें कोई संदेह नहीं कि इस सीट पर जातिगत समीकरण ने ही चुनाव परिणाम निर्धारित किया है। बतौर उदाहरण सन 2014 के लोकसभा चुनाव में विजयी प्रत्याशी भाजपा के भैरव प्रसाद मिश्रा से दूसरे स्थान पर रहे बसपा के आरके पटेल के वोटों का अंतर 13.49% था। 2014 में भाजपा को 39.9%, सपा को 22.1% व बसपा को 26.4% व कांग्रेस को 4.3% वोट मिला था। एक नज़र में देखा जाए तो मुकाबला त्रिकोणीय था। इस बार चूंकि सपा-बसपा गठबंधन मैदान में है इसलिए भाजपा को मुश्किल हो सकती है लेकिन कांग्रेस ने एक बड़े कुर्मी बिरादरी के चेहरे को मैदान में उतारकर समीकरण रोचक बना दिया है। जिसका प्रभाव निश्चित रूप से दिखाई पड़ेगा। हालांकि भाजपा भी यदि कोई ऐसी ही चाल चलती है तो सपा-बसपा गठबंधन की राह कठिन हो सकती है। इस संसदीय सीट पर लगभग 2 लाख से अधिक कुर्मी व लगभग 2 लाख 30 हजार से अधिक ब्राम्हण वोटर महत्वपूर्ण निर्णायक भूमिका निभाते हैं प्रत्याशियों का भाग्य बदलने में। नेपथ्य के पीछे जाने पर भी इस बात की तस्दीक होती है कि इस संसदीय सीट पर ब्राम्हण व कुर्मी मतदाताओं व प्रत्याशियों ने ही निर्णायक भूमिका अदा की है। बतौर उदाहरण 1977, 1980,1984, 1992, 1996, 1998 व 2014 के लोकसभा चुनाव में ब्राम्हण प्रत्याशी ही चुनाव जीतता रहा है।

मतदाताओं की स्थिति

कुल मतदाता: 19,96,599

पुरुष मतदाता: 10,89,269

महिला मतदाता: 9,07221

युवा मतदाता: 8,29,149

अन्य: 107

पोलिंग बूथ: 2,293

पोलिंग स्टेशन: 1,459

2014 लोकसभा चुनाव

भाजपा से भैरव प्रसाद मिश्रा जीते, इन्हें 39.9 फीसदी वोट मिले। 26.4 फीसदी वोट पाकर बसपा के आर. के. सिंह पटेल दूसरे, सपा के बाल कुमार पटेल 22 फीसदी वोटों के साथ तासरे और कांग्रेस प्रत्याशी विवेक कुमार सिंह चौथे नम्बर पर रहे।

कौन कब जीता

1957 - राजा दिनेश सिंह - कांग्रेस
1962 - सावित्री निगम - कांग्रेस
1967 - चौधरी जगेश्वर सिंह यादव - सीपीआई
1971 - राम रतन शर्मा - जन संघ
1977 - अंबिका प्रसाद पांडेय - जनता पार्टी
1980 - रामनाथ दूबे - कांग्रेस
1984 - भीष्म देव दूबे - कांग्रेस
1989, 96, 99 - राम सजीवन - बसपा
1991 - प्रकाश नारायण त्रिपाठी - भाजपा
1998 - रमेश चन्द्र द्विवेदी - भाजपा
2004 - श्याम चरन गुप्ता - सपा
2009 - आर. के. सिंह पटेल - सपा
2014 - भैरव प्रसाद मिश्रा - भाजपा