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आ गई इम्तिहान की घड़ी, सूखते हलक तक पानी पहुंचाने को लेकर मंथन शुरू

जहां भी पेयजल किल्लत की समस्या है वहां ग्राम निधि से बोर करवाकर सबमर्सिबल पम्प टंकी का निर्माण करवाएं...

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DM action for against Water crisis in Bundelkhand UP hindi news

आ गई इम्तिहान की घड़ी, सूखते हलक तक पानी पहुंचाने को लेकर मंथन शुरू

चित्रकूट. सूरज की अंगड़ाई और गर्मी के दबे पांव दस्तक देने के बीच बुंदेलखंड में पेयजल किल्लत को दूर करने को लेकर हुक्मरानों की इम्तिहान की घड़ी भी आ रही है। बुंदेलखंड के सूखे हलक तक पानी पहुंचाने के अब तक न जाने कितने प्रयास और दावे किए गए परंतु ज़िम्मेदारों की उदासीनता और सिस्टम की अव्यवस्था के कारण इस इलाके में पेयजल किल्लत को दूर करने का अंश बराबर भी समाधान नहीं हो पाया, समुचित समाधान तो फ़िलहाल काल्पनिक श्रेणी में आता है। निजाम बदलते गए सूरत वही रही। एशिया की सबसे बड़ी जलकल योजना प्रारम्भ होने के बावजूद पाठा आज तक प्यासा है अलबत्ता योजनाओं के नाम पर बाबुओं से लेकर साहब लोगों तक ने जरूर अपनी तिजोरियां तर की हैं। अब जबकि यूपी में भगवा ब्रिगेड की सरकार है और बुंदेलखंड में इस विकट समस्या को दूर करने को लेकर चुनाव से अब तक कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं तो अब देखना यह भी है कि इस पंचवर्षीय सत्ता में बुंदेलखंड के हलक से नीचे अंतड़ियों तक पानी पहुंचता है कि नहीं?

पानी की किल्लत शुरू

मौसम के बदलते रुख (गर्मी) के साथ ही बुंदेलखंड में जलदेवता की बेरुखी शुरू हो गई है। दुर्गम इलाकों में अभी से ही पानी की किल्लत महसूस की जाने लगी है। फ़िलहाल इस समस्या को लेकर काफी संजीदा दिख रहे प्रदेश के हुक्मरानों का चिंतन मंथन भी प्रारम्भ हो गया है तो वहीँ जनपद स्तर पर भी प्रशासनिक लम्बरदार और जनप्रतिनिधि आने वाले दिनों में पेयजल समस्या से निपटने के विषय पर बैठक कर समस्या समाधान की रूपरेखा तैयार करने में लग गए हैं।

पेयजल समस्या को लेकर बैठक

पेयजल समस्या को लेकर डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने मातहतों के पेंच कसते हुए अभी से कमर कस लेने की हिदायत दी। भाजपा विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय और अधीनस्थों ले साथ बैठक में पेयजल समस्या से निपटने को लेकर खाका तैयार किया गया। इस भीषण समस्या से सबसे ज्यादा ग्रसित पाठा क्षेत्र में विशेष ध्यान देने की बात कही गई। हैण्डपम्पों से लेकर कुओं तालाबों चरही आदि पानी के साधनों का मूल्यांकन कर उत्पन्न समस्याओं को दूर करने पर कार्य शुरू करने की नसीहत मातहतों को डीएम ने दी।


राज्य वित्त की धनराशि से करें समस्या का समाधान

बैठक में मातहतों और ग्राम प्रधानों तथा सचिवों को निर्देशित किया गया कि गांवों में पेयजल संकट को देखते हुए राज्य वित्त आयोग की धनराशि के तहत है हैण्डपम्प, चरही, बोरिंग आदि कार्यों में व्यय किया जाए। जो पानी की टंकियां खराब हो गई हैं जल निगम उन्हें तत्काल ठीक कराए। पाठा क्षेत्र के मानिकपुर विकास खण्ड के कई गांवों में भीषण पेयजल संकट को देखते हुए सोलर पम्प सेट लगाने व् बोरिंग करवाने को लेकर तुरंत पूरी कार्ययोजना बनाने के निर्देश मातहतों को दिए गए। ग्राम प्रधानों व् सचिवों से कहा गया कि उनके इलाकों में जहां-जहां भी पेयजल किल्लत की समस्या है वहां ग्राम निधि से बोर करवाकर सबमर्सिबल पम्प टंकी का निर्माण करवाएं।


विभागों को खास निर्देश

लोगों को साफ व् स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी सम्भालने वाले जल निगम व् जल संस्थान को खास हिदायत देते हुए डीएम ने कहा कि भीषण पेयजल संकट से जूझने वाले पाठा क्षेत्र के गांवों का निरीक्षण कर सम्बंधित प्रधानों व् सचिवों को समस्या समाधान के बारे में अवगत करवा दें। समय रहते यदि कार्य शुरू हो जाएगा यो समस्या से निपटने में आसानी होगी।


पाठा के ये इलाके हैं सबसे ज्यादा प्रभावित

कई वर्षों से पाठा के जिन इलाकों में पानी की समस्या खून के आंसू रुलाती है वे हैं, बम्बिया, रामपुर कल्यानगढ़, दस्यु प्रभावित नागर गांव, बराहमाफी, करौंहा, छेरिहा बुजुर्ग/खुर्द, जारोमाफी, किहुनियां, अमचुर नेरुआ, डोडामाफी, टिकरिया, जमुनिहाई, इटवा डुडैला(सभी दस्यु प्रभावित) ,मनगवां, उमरी, चुरेह केशरूआ, ऊँचडीह, और कोटा कंदैला। इन इलाकों में अभी से ही पेयजल समस्या की दस्तक शुरू हो गई है।