
चित्रकूट. जीवनदायिनी मंदाकिनी के सिकुड़ते आंचल और खतरे में पड़े उसके अस्तित्व को बचाने के लिए अब मनरेगा का सहारा लिया जाएगा। योजना के तहत मंदाकिनी को प्रदूषण मुक्त करने से लेकर उसके जल स्रोतों को जीवंत करने तक का खाका तैयार किया गया है। जिला प्रशासन जल्द ही इस पर काम शुरू करने वाला है। गौरतलब है कि पवित्र मंदाकिनी कई जगह विलुप्त होने के कगार पर है और जल स्रोत सूख गए हैं तो कई जगहों पर मंदाकिनी की निशानी ही बची है। स्थानीय समाजसेवियों व नदी को बचाने का बीड़ा उठाने वालों के बाद अब प्रशासन ने भी अपनी तरफ से कदम बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की है।
भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट की जीवनरेखा सहित बुन्देलखण्ड की आस्था की प्रतीक पवित्र मंदाकिनी नदी के दिन-ब-दिन बिगड़ते हालात ने स्थानीय लोगों से लेकर अब प्रशासन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। स्थानीय लोगों द्वारा हर नदी को बचाने के हर सम्भव प्रयास के इतर अब प्रशासन भी अपनी तरफ से सरकारी योजनाओं के माध्यम से मंदाकिनी के अस्तित्व को बचाने के लिए आगे आया है।
मनरेगा से बचेगी मंदाकिनी
मनरेगा योजना के तहत मंदाकिनी को बचाने की रूपरेखा तैयार की गई है। जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने मातहतों को निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत कार्ययोजना तैयार कर ली जाए जल्द से जल्द और नदी के विलुप्त जलस्रोतों की खुदाई करते हुए उन्हें खोला जाए ताकि नदी में पानी की मात्रा पुनः बढ़ सके। योजना के तहत पहाड़ी ब्लाक 17 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत लगभग 38 किलोमीटर की परिधि में नदी की खोदाई की जाएगी। जिन स्थानों पर पानी का स्रोत थोड़ा बहुत खुला हुआ है और पानी मौजूद हैं वहां सिंचाई विभाग के अभियंताओं की देखरेख में कार्य कराया जाएगा।
कई जगहों पर विलुप्त हो रही मंदाकिनी
कई जगहों पर मंदाकिनी विलुप्त हो रही है। जनपद के राजापुर इलाके के सैकड़ों गांवों में सिंचाई से लेकर पेयजल तक का भीषण संकट उत्पन्न हो रहा है नदी के सूखने की वजह से। एक तो अपेक्षानुरूप बारिश का न होना और उसपर से कई जगहों पर बांध बनाए जाने से आज मंदाकिनी की यह हालत हो रही है। प्रदूषण की पराकाष्ठा तो देखते ही बनती है।
कुछ इस तरह हो गई है पवित्र जीवनदायिनी की हालत
राम तेरी मंदाकिनी मैली हो गई प्रदूषण की मार से , जी हां मंदाकिनी पापियों के पाप धोने से उतनी मैली नहीं हुई जितनी अपनों की उपेक्षा और प्रदूषण की मार से हुई। बड़े बड़े मठ आश्रमों होटल धर्मशालाओं व् अन्य प्रतिष्ठानों की गन्दगी सीधे इस सदानीरा के आंचल में गिरती है और आज तक नदी को माँ का दर्जा देने वाले सिर्फ खोखली बातों व दावों के आलावा कुछ न कर सके। असल में देखा जाए तो जो नदी को बचाने का हल्ला मचाते हैं वही सबसे ज्यादा गुनहगार भी हैं उसे मैला करने के लिए।
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Published on:
06 May 2018 01:53 pm
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