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तपोबल से उत्पन्न हुई मंदाकिनी को बचाने के लिए कौन करेगा तप, अपनों ने ही बंजर कर दी माँ की कोख

भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट की जीवन रेखा पवित्र मंदाकिनी नदी का अस्तित्व विलुप्त होने के कगार पर शैने शैने अग्रसर हो रहा है।

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चित्रकूट. भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट की जीवन रेखा पवित्र मंदाकिनी नदी का अस्तित्व विलुप्त होने के कगार पर शैने शैने अग्रसर हो रहा है। मंदाकिनी उस पवित्र नदी का नाम है जिसमें खुद प्रभु श्री राम ने चित्रकूट में अपने वनवासकाल के दौरान डुबकी लगाई है। बुंदेलखण्ड की आस्था का केंद्रबिंदु है मंदाकिनी और एक ऋषि पत्नी के तपोबल से उत्पन्न हुई है मंदाकिनी, परंतु आज इस पवित्र नदी का आंचल इस कदर मैला हो गया है कि इस पर आस्था रखने वाले भी सूरत देखकर बिचक जाते हैं। कई जगहों पर तो इस सदानीरा के अवशेष ही बचने के संकेत अभी से मिलने लगे हैं कि अमुक जगह से कभी पवित्र मंदाकिनी नदी गुजरती थी। आखिर किसकी नजर लग गई इस पुण्य सलिला को जो इसका वजूद भी खुद को बचाने के लिए कराह रहा है। कहीं अपनों ने ही तो नहीं बंजर कर दी अपनी मां की कोख?

श्री राम की मंदाकिनी आज नष्ट होने के मुहाने पर कराहते हुए सांसे ले रही है। सती अनुसुईया (ऋषि अत्रि की पत्नी) के तपोबल से उत्पन्न मंदाकिनी किस गुनाह की सजा पा रही है इसका जवाब भी उन्हीं इंसानों के पास है जिन्होंने इसे माँ की संज्ञा दी। भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट की यदि जीवन रेखा है मंदाकिनी तो बुंदेलखण्ड के अस्तित्व का प्रतीक भी है पवित्र मंदाकिनी। हर महीने की अमावस्या पर हजारों लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ की कामना लिए इसकी गोद में अठखेलियां करने उमड़ पड़ते हैं। लेकिन ऐसा अब कुछ वर्षों तक ही हो पाएगा क्योंकि धीरे धीरे अपने अंत की ओर बढ़ रही है पवित्र मंदाकिनी।

कई जगह पर भयंकर प्रदूषण तो कई जगह पर सूख गई है नदी

सती अनुसुईया के तपोबल से उत्पन्न मंदाकिनी आज खुद पर आंसू बहा रही है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को अपनी आगोश में समेटे हुए दोनों राज्यों के बीच से बहने वाली इन पवित्र नदी की सूरत कई जगह इतनी बिगड़ गई है कि पहचानना भी मुश्किल हो जाता है। रामघाट(उत्तर व् मध्य प्रदेश) से लेकर आगे मुख्यालय की ओर बढ़ती नदी में भयंकर प्रदूषण ने कब्जा करते हुए इंसानों को खुद आइना दिखाया है कि इसके जिम्मेदार भी वही हैं। सूरजकुंड के आस पास नदी एकदम से सूखने की कगार पर है। पानी की नमूने भर की मात्रा नदी के अस्तित्व पर घोर संकट बयां करती है।

मंदाकिनी का कसूरवार कौन

चित्रकूट में न तो बड़ी फैक्ट्रियां हैं और न ही कोई बड़े कल कारखाने जिससे यह साफ हो कि नदी में इन्ही के द्वारा प्रदूषित हो रही है। इसके इतर इस धार्मिक नगरी में बड़े बड़े मठ आश्रम होटल धर्मशालाएं और नाले जरूर हैं जो इसकी पवित्रता का चीरहरण करते आए हैं। इन स्थानों से निकलने वाला गंदा पानी और नाला सीधे मंदाकिनी को अपवित्र करते हुए उसे प्रदूषण की काल कोठरी में ढकेल देते हैं। प्रदूषण का मुद्दा उठने पर चिल्लाते तो सब हैं परंतु इस कसूर के लिए कौन कसूरवार है इसकी बात आने पर कोई भी अपने गिरेबां में नहीं झांकता।

हुक्मरानों ने भी उड़ाया मजाक

नदियों को माँ का दर्जा देने वाली भगवा ब्रिगेड की सरकार यूपी व् एमपी दोनों राज्यों में हैं फिर भी मंदाकिनी की कराहती आह हुक्मरानों को भी कटघरे में खड़ा कर देती है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक बार नहीं कई बार मंदाकिनी को प्रदूषणमुक्त करने का दम्भ भरा लेकिन कुछ समय बाद भोपाल से उनकी पहल चित्रकूट तक न पहुंच पाई। वहीं यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो बार चित्रकूट का दौरा किया और नदियों को लेकर बड़ी बड़ी बातें भी की जिसमें मंदाकिनी का भी जिक्र शामिल था लेकिन लखनऊ से उनकी आवाज भी मंदाकिनी की आह को शांत नहीं कर पाई।

भयावाह जल संकट का संकेत

इस पवित्र नदी के किनारे बसे हजारों बाशिंदे इसी माँ की दया पर निर्भर हैं और अपने सूखे कण्ठ की प्यास बुझाते हैं लेकिन जो हालात उत्पन्न हो रहे हैं उससे आगामी दिनों और भविष्य में भयावाह जल संकट का स्पष्ट संकेत मिल रहा है। इंसानों ने ही अपनी धरोहर को इस कदर प्रदूषण का जहर दिया अब वो जहर खुद उनके लिए घातक सिद्ध हो रहा है। मंदाकिनी बार बार अपने भागीरथी पुत्रों को ढूंढ रही है कि जो दम्भ भरते हैं माँ को बचाने का जरा वो असल में वैसा करके तो दिखाएं।