
पत्रिका इम्पेक्ट: अन्ना जानवरों के आतंक की समस्या से मिलेगी निजात पशु आश्रय स्थल बनेंगे सहारा
चित्रकूट. अन्ना जानवरों के आतंक पर जिम्मेदारों ने संजीदगी दिखाते हुए अन्नदाताओं के दर्द को कम करने का प्रयास शुरू कर दिया है। जनपद के सभी पांच ब्लाकों में पशु आश्रय स्थल एवं गौशालाएं खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चार पशु आश्रय स्थल के निर्माण का कार्य प्रारम्भ हो चुका है जबकि एक स्थल के लिए जमीन चिन्हीकरण की प्रक्रिया चल रही है। गौरतलब है कि अन्ना जानवरों की नासूर बनती समस्या को लेकर पत्रिका ने लगातार आवाज उठाई और सिस्टम के जिम्मेदारों तक किसानों के दर्द को पहुंचाया। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो भविष्य में काफी हद तक अन्ना जानवरों की समस्या से निजात मिलने की संभावना है।
समस्या से निजात मिलने की संभावना
बुंदेलखण्ड की नासूर बन चुकी अन्ना जानवरों की समस्या से जल्द ही किसानों को निजात मिलेगी ऐसी संभावना उन प्रयासों के तहत उत्पन्न हुई है जिसके तहत पशु आश्रय स्थल एवं गौशालाएं खोलने का काम शुरू किया गया है। चित्रकूट में भी किसान इस सुरसा के मुंह रूपी समस्या से जूझ रहे हैं। दिन रात खेतों की रखवाली के बावजूद अन्ना जानवरों से उनकी फसलें सुरक्षित नहीं हो पा रहीं और परिणामतः किसानों की नजरों के सामने ही फसलें नष्ट हो जा रही हैं। किसान कई बार जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन तक इस समस्या से निजात के लिए गुहार लगा चुके हैं।
पशु आश्रय स्थल एवम् गौशालाओं के निर्माण का काम शुरू
किसानों की मेहनत पर ग्रहण लगाती इस समस्या को लेकर इस बीच व्यवस्था के पहरुए हरकत में आए और जनपद के सभी पांच ब्लाकों(मऊ मानिकपुर कर्वी पहाड़ी व् रामनगर) में पशु आश्रय स्थल स्थापित करने का काम शुरू किया चुका है। जनपद के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ। सुधीर कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि हर ब्लाक में एक पशु आश्रय स्थल का निर्माण होना है जिसके तहत विकास खण्ड मानिकपुर, पहाड़ी व् कर्वी में आश्रय स्थल के निर्माण का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। मऊ ब्लाक के गढवा गांव में बुधवार को पशु आश्रय स्थल का शिलान्यास किया गया भाजपा सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा व् विधायक(भाजपा) आरके सिंह पटेल द्वारा। एक स्थल के लिए जमीन चिन्हीकरण का काम चल रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के मुताबिक जनपद में वृहद गौ सरंक्षण केंद्र की स्थापना होने जा रही है। तीन पशु बाड़े बन रहे हैं। पांच पंजीकृत गौशालाएं हैं इनमें जानवर जब रखे जाएंगे तभी उन्हें अनुदान मिलेगा लेकिन अभी उनमें ये प्रक्रिया धीमी है जिसके लिए लगातार प्रयास जारी है।
पशु पालक भी रखें ध्यान
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सुधीर कुमार सिंह ने कहा कि पशु पालकों खास तौर पर गाय रखने वालों को भी ध्यान रखना चाहिए कि वे दुग्ध उत्पादन के बाद पशुओं को न छोड़ दें बल्कि उनका पालन पोषण करें। विभाग इसके लिए समय समय पर पशुपालकों को जागरूक भी करता रहता है।
Published on:
20 Sept 2018 02:03 pm
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