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वास्तविक गंगा पुत्र थे प्रो. जीडी अग्रवाल(स्वामी सानंद) श्री राम की तपोभूमि से रहा गहरा नाता मंदाकिनी के लिए छेड़ा था अभियान

प्रो. जीडी अग्रवाल ने धर्म नगरी चित्रकूट को अपनी कर्म स्थली बनाया और महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दी
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वास्तविक गंगा पुत्र थे प्रो. जीडी अग्रवाल(स्वामी सानंद) श्री राम की तपोभूमि से रहा गहरा नाता मंदाकिनी के लिए छेड़ा था अभियान

चित्रकूट: गंगा की अविरलता निर्मलता को लेकर पिछले 111 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रो जीडी अग्रवाल(स्वामी सानंद) के निधन से जनपद में शोक की लहर है. उनके साथ अविस्मरणीय क्षण बिता चुके कई विद्यार्थी समाजसेवी गंगा पुत्र के निधन की खबर से स्तब्ध रह गए. लोगों में एक तरफ शोक भी व्याप्त है तो दूसरी तरफ सरकार के प्रति आक्रोश भी कि इतने दिनों से गंगा की अविरलता के लिए आमरण अनशन पर बैठे एक प्रसिद्द वयोवृद्ध की सुध लेने वाला कोई नहीं था जबकि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर निरंतर बड़ी बड़ी बातें की जाती रही हैं.

समर्थन में धर्मनगरी में भी शुरू हुआ था क्रमिक अनशन

प्रो. जीडी अग्रवाल के समर्थन में धर्म नगरी के युवाओं व समाजसेवियों ने भी क्रमिक अनशन शुरू किया था लेकिन गुरुवार शाम उनके निधन की खबर ने अनशनकारियों को झकझोर दिया. सभी इस बात से आहत थे कि नदियों व पर्यावरण को लेकर लड़ाई लड़ने वाले एक योद्धा का अंत हो गया.

धर्म नगरी से गहरा नाता रहा प्रो जीडी अग्रवाल का

86 वर्ष की उम्र में जीवन की अंतिम बेला से विदाई लेने वाले प्रसिद्द पर्यावरणविद् प्रो. जीडी अग्रवाल(स्वामी सानंद) का धर्म नगरी से गहरा नाता था. प्रो. जीडी अग्रवाल ने धर्म नगरी चित्रकूट को अपनी कर्म स्थली बनाया और महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दी. 2009 में उन्होंने भागीरथी नदी पर बांध निर्माण रुकवाने के लिए अनशन किया था जो सफल रहा. प्रो जीडी अग्रवाल आई आई टी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में प्राध्यापक व् केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रथम सचिव और राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय के सलाहकार भी रह चुके थे.

मंदाकिनी को लेकर भी छेड़ा था अभियान

प्रो. जीडी अग्रवाल ने पवित्र मंदाकिनी नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर कई साल पहले वृहद स्तर पर अभियान छेड़ा था. इसके तहत वे खुद अपने हांथों से श्रम कार्य किया करते थे. उनकी प्रेरणा से आम लोगों में नदी को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर जागरूकता आई. बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, समाजसेवी अभिमन्यु भाई, योगेश जैन, महंत दिव्य जीवन दास, महंत रामप्यारे दास, सनकादिक महाराज आदि साधू संतों ने प्रो. जीडी अग्रवाल के निधन को एक अपूर्णीय क्षति बताया और कहा कि आज वास्तविक रूप में एक गंगा पुत्र ने अपने प्राण त्यागे हैं. चित्रकूट से उनका काफी गहरा लगाव था.

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