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Chitrakoot News: दिन पे दिन बदहाल होता जा रहा चन्देलों का ऐतिहासिक मंदिर व तालाब,अब….

चित्रकूट जनपद के रामनगर ब्लॉक स्थित ऐतिहासिक चंदेल कालीन मंदिर एवं तालाब की जर्जर हालत वर्तमान व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

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Chitrakoot News: दिन पे दिन बदहाल होता जा रहा चन्देलों का ऐतिहासिक मंदिर व तालाब,अब....

Chitrakoot News: दिन पे दिन बदहाल होता जा रहा चन्देलों का ऐतिहासिक मंदिर व तालाब,अब....

बता दे की रामनगर चित्रकूट जनपद में ऐतिहासिक महत्व रखता है। महत्व चन्देलों के जल संचय की पुरातन तकनीक एवं शानदार नक्काशी से अधूरे बने मंदिर या फिर कहिए कई ऐतिहासिक रहस्यों को अपनी गोद मे समेट कर इतिहास के पन्नो में मौन उपस्थिति के कारण से हो। स्थल में दो अधूरे मंदिर स्थित हैं।

एक मंदिर हिन्दू देवी देवताओं को समर्पित है। जहां मंदिर के पूर्वी द्वार के नीचे नंदी मूर्ति स्थापित है। लेकिन नंदी मूर्ति अपने मूल स्थान पर नहीं है। इसका कारण कुछ भी हो बहरहाल पता नहीं। मंदिर के गर्भगृह में एक शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के ऊपर चबूतरे पर अर्धनिर्मित रेलिंग के साथ ही कई अधूरे पत्थर पड़े हुए हैं।

चबूतरे के नीचे चारों तरफ बहुतायत में भग्नावशेष बिखरे पड़े हैं। जोकि आधे अधूरे हैं। मुख्य मंदिर के दक्षिण एक और मंदिर है वो भी अधूरा बना हुआ है। लेकिन उस मंदिर में मुख्य मंदिर की तरह किसी भी हिन्दू देवी देवताओं के चित्र की नक्काशी नहीं मिलती।

मंदिर के दाहिने एक मध्यम आकार की ऊंची दिगम्बर जैन मूर्ति स्थित है। जिसमें परम्परागत आभा मंडल साथ ही पद्मासन ध्यान मुद्रा में लीन मूर्ति है। जोकि जीर्ण शीर्ण अवस्था को प्राप्त होने की कगार पर है। मंदिर परिसर तो वैसे भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

लेकिन और बढ़िया व्यवस्था के अभाव में स्थल पर्यटकों से दूर है। संरक्षण के लीपापोती के इस खेल में अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए पुरातत्व विभाग ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। सरकार से ये मांग जरूर होनी चाहिए कि चंदेल कालीन इस ऐतिहासिक महत्व के मंदिर का जीर्णोद्धार हो एवं मंदिर से लगे तालाब का सौंदर्यीकरण हो।

मंदिर तक पहुंचने के लिए मार्ग का चौड़ीकरण हो एवं मंदिर की ऐतिहासिकता को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में बड़े पैमानों पर उत्खनन भी हो मंदिर की अव्यवस्था की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए जनता से लेकर सरकार तक सभी लोग बराबर के जिम्मेदार है।

बहरहाल देखने वाली बात होगी कि आखिर कब चन्देलों के गौरव का साक्षी रामनगर का यह मंदिर अपने मूल गौरव को प्राप्त करता है।