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चित्रकूट में बनेगा यूपी का पहला ग्लास स्काईवॉक, तुलसी वाटरफॉल पर दिखेंगे ये नजारे

चित्रकूट के तुलसी वाटरफॉल पर ग्लास स्काईवॉक प्रोजेक्ट जल्द बनकर तैयार होगा। जानिए इस स्पेशल प्रोजेक्ट के बारे में।
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चित्रकूट में तुलसी वाटरफॉल पर यूपी का पहला ग्लास स्काईवॉक पुल बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश वन निगम यानी UPFC ने चित्रकूट वन क्षेत्र के मारकुंडी रेंज में झरने के ऊपर ग्लास स्काईवॉक ब्रिज बनाने का प्रस्ताव दिया है।

पहले नाम था शबरी वाटरफॉल
पहले इसे शबरी वाटरफॉल कहा जाता था लेकिन इस साल की शुरुआत में राज्य सरकार ने इसका नाम बदलकर तुलसी वाटरफॉल कर दिया।

क्यों है चित्रकूट ग्लास स्काईवॉक पुल स्पेशल?
इस खूबसूरत साइट में पानी की कम से कम तीन रिवर स्ट्रीम्स चट्टानों के माध्यम से गिरती हैं। ये लगभग 40 फीट की ऊंचाई पर एक वाइड वाटर बेड यानी जल शैया में और फिर अंत में जंगल में लुप्त हो जाती हैं। जैसे ही लोग स्काईवॉक पुल पर चलते हैं, चट्टानों पर पानी गिरने की आवाज सुनी जा सकती है।

ग्लास स्काईवॉक से नीचे जंगल का नजारा भी दिखेगा। ग्लास वॉक पूरा होने के बाद इस जगह पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है।

चित्रकूट ग्लास स्काईवॉक परियोजना की खासियत
चित्रकूट ग्लास स्काईवॉक परियोजना में एक रॉक गार्डन, कैक्टस गार्डन और वाटरफॉल के पास ईकोटूरिज्म एड-ऑन के रूप में व्यू शेड्स का भी प्रस्ताव है।

पहला ग्लास स्काईवॉक असम में
चित्रकूट स्काईवॉक परियोजना की प्रेरणा बिहार के राजगीर में स्काईवॉक ग्लास ब्रिज से ली गई है। यूपी वन विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि वे जल्द ही उन सलाहकारों से संपर्क करेंगे जिन्होंने बिहार के ग्लास स्काईवॉक पुल डिजाइन किया था। इसका उद्घाटन 2020 में हुआ था और यह देश की अपनी तरह की दूसरी परियोजना थी। पहला ग्लास स्काईवॉक ब्रिज असम में बनाया गया था।

वन निगम ने शुरू में चंदौली में चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में चंद्रप्रभा नदी पर राजदरी-देवदारी वाटरफॉल की पहचान की थी। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ है। लेकिन अंत में चित्रकूट का तुलसी वाटरफॉल प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था।

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