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पुलिस को मिली बड़ी सफलता, शंकर केवट गैंग का इनामी डकैत गिरफ़्तार

शंकर केवट गैंग के इनामिया डकैत को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफ़लता पाई है.

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चित्रकूट. चित्रकूट के बीहड़ों से लेकर तराई के इलाकों में कभी ख़ौफ का दूसरा नाम रहे दस्यु शंकर केवट गैंग के इनामिया डकैत को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफ़लता पाई है. ख़ाकी की गिरफ्त में आए इस डकैत पर पुलिसकर्मी की हत्या सहित लगभग दस मुकदमें दर्ज हैं और 20 हजार का इनाम भी घोषित था. पकड़ा गया डकैत खूंखार दस्यु सरगना शंकर केवट के साथ उसके गैंग में रहता था और गैंग के साथ मिलकर कई वारदातों को अंजाम देने में शामिल था. शंकर केवट के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसके शागिर्द दस्यु घनश्याम केवट के साथ मिलकर वारदातों को अंजाम देता था. घनश्याम केवट के भी मारे जाने के बाद इस डकैत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और इन दिनों यह जमानत पर रिहा होकर इधर उधर छिपकर आराम फ़रमा रहा था कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उक्त डकैत को अपनी गिरफ़्त में ले लिया. गिरफ़्तार डकैत के पास से एक तमंचा व 2 जिंदा कारतूस 315 बोर बरामद हुए है.

दहशत का दूसरा नाम रहे खूंखार डकैत शंकर केवट गैंग के इनामी डकैत कामता निषाद को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. राजापुर थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर थाना क्षेत्र के अर्की मोड़ के पास से उक्त डकैत को गिरफ्तार किया गया. पकड़े गए डकैत के ऊपर 20 हजार का इनाम घोषित था. थानाध्यक्ष के मुताबिक गिरफ़्त में आए दस्यु कामता निषाद के ऊपर पुलिसकर्मी की हत्या सहित दस मुकदमे दर्ज हैं और यह काफी दिनों से वांछित चल रहा था. खूंखार दस्यु शंकर केवट व् घनश्याम केवट के साथ मिलकर यह डकैत वारदातों को अंजाम देता था. घनश्याम केवट के मारे जाने के बाद इसने आत्मसमर्पण कर दिया था और फिर जमानत पर रिहा होकर फतेहपुर व् कौशाम्बी में इसने अपना ठिकाना बनाया था. इस डकैत के खिलाफ कुर्की के भी आदेश हो चुके थे.

खौफ का दूसरा नाम था शंकर केवट

जिस शंकर केवट गैंग में पुलिस की गिरफ्त में आया यह डकैत रहकर वारदातों को अंजाम देता था और पुलिसकर्मी की हत्या की गई थी उस शंकर को खौफ के दूसरे नाम से जाना जाता था. फतेहपुर कौशाम्बी तथा चित्रकूट के राजापुर थाना क्षेत्र के कछारी इलाकों में शंकर केवट की दहशत की इतनी थी कभी कि उसकी आहट पाते ही लोग दिन के उजाले में भी घरों में कैद रहते थे. धीरे धीरे शंकर केवट ने पूरे राजापुर क्षेत्र में अपना खौफ कायम कर लिया और पुलिस को कई मुठभेड़ों में सीधी टक्कर दी. फतेहपुर जनपद का निवासी खूंखार डकैत शंकर केवट ने चित्रकूट कौशाम्बी और फतेहपुर के तराई इलाकों में अपनी गैंग की चहलकदमी से दहशत की इबारत लिख दी थी. फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक वीर बहादुर सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने इस डकैत को सन 2007 में फतेहपुर के सरकंडी जंगल में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था. हत्या लूट डकैती अपरहण आदि के 40 मुकदमे दर्ज थे कुख्यात शंकर केवट के ऊपर.

घनश्याम केवट था शागिर्द

अचूक निशानेबाज और सन 2009 के जून महीने में लगभग 52 घण्टों तक ख़ाकी को अकेले टक्कर देने वाले घनश्याम केवट ने शंकर केवट गैंग से ही बीहड़ की दुनिया का ककहरा सीखा. दस्यु सरगना शंकर केवट के मारे जाने के बाद गैंग की कमान घनश्याम केवट के हांथ में आ गई. सन 2008 में घनश्याम केवट ने चित्रकूट के राजापुर थाना क्षेत्र के सरधुआ गांव में चित्रकूट एसओजी के इंस्पेक्टर अभय राय की गोली मारकर हत्या कर सनसनी फैला दी थी. घनश्याम केवट से पुलिस की मुठभेड़ 2009 में राजापुर थाना क्षेत्र के जमौली गांव में हुई थी और इस मुठभेड़ में घनश्याम केवट की गोली से 4 पुलिसकर्मी शहीद तथा 7 पुलिसकर्मी घायल हुए थे. 52 घण्टों की मुठभेड़ के बाद दस्यु घनश्याम मारा गया था.