
सिस्टम की उदासीनता: कनेक्शन हो गया बिल भी आ गया पर नहीं मिल रहा पानी पेयजल संकट को लेकर इस ग्रामीण इलाके की कहानी
चित्रकूट: इसे सिस्टम की उदासीनता का जीता जागता उदाहरण कहें या पराकाष्ठा कि एक गांव में कनेक्शन भी हो गया बिजली वाले नल का बिल भी आ गया लेकिन उस पर तुर्रा यह कि नल के हलक से पानी की बूंदे भी न टपकीं. पेयजल संकट को लेकर हालात ये हैं कि ग्रामीणों को डेढ़ दो किलोमीटर दूर हैण्डपम्पों से पानी लाना पड़ता है. पूरी समस्या के विषय में पूरा सिस्टम वाकिफ है लेकिन धरातल पर प्रयास करने के बजाए अपना अपना कुर्ता ढीला बताया जा रहा है. गांव में सैंकड़ों कनेक्शन हैं बिजली के नल के परंतु वे सिर्फ ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रहे हैं और व्यवस्था को आइना दिखा रहे हैं.
भीषण पेयजल संकट
जनपद के मऊ विकास खण्ड का नीबी गांव जो इस समय भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है. ऐसा नहीं कि गांव में पेयजल किल्लत दूर करने का प्रयास नहीं किया गया , हुक्मरानों की नजरों में नायक बनने की हसरत लिए सम्बंधित विभागों ने यहां पाइप लाइन नल के कनेक्शन बोर आदि सब जुगाड़ बैठा दिए. इन सबके इतर गांव पेयजल संकट से संघर्षरत है. जो बोर किया गया था वो पिछले एक महीने से ज्यादा समय से खराब है परिणामतः पानी की सप्लाई ठप है. गांव में जल निगम की ओर से भी कनेक्शन दिए गए हैं. मऊ बरगढ़ पेयजल योजना के तहत ये कनेक्शन दिए गए हैं. करोड़ों की लागत से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य मऊ व् बरगढ़ के सैकड़ों गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था लेकिन गांव में पानी न पहुंच सका.
सिर्फ आश्वासन सुनवाई नहीं
पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तहसील से लेकर जिला व विभागीय स्तर तक शिकायत की गई लेकिन सिर्फ आश्वासन के सिवा और कुछ न मिला. ग्राम प्रधान बलराम सिंह के मुताबिक समस्या को लेकर बात एसडीएम से लेकर जल निगम जल संस्थान तक पहुंचाई गई परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई. गांव में पानी की विकट समस्या है. वहीँ प्रिंस, शिवपूजन, ननकुल, विकास, रत्नाकर, आदि ग्रामीणों ने बताया कि नल से पानी तो नहीं मयस्सर हो रहा लेकिन बिल जरूर आ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बिल क्यों भेज रहे हैं जब पानी नहीं दे सकते.
जिम्मेदारों की अपनी ढपली अपना राग
जल संस्थान
समस्या समाधान को लेकर जब पत्रिका ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एसके निरंजन से पूछा तो उनका कहना था कि मामला उनके संज्ञान में और जिलाधिकारी के भी. गांव में अब जल निगम पानी की सप्लाई का काम देखता है. जो बोर खराब हुआ है उसे रिबोर भी जल निगम ही करेगा इसलिए वे बेहतर बता सकते हैं. हमारा काम संचालन का है. बिल के बारे में पूछे जाने पर अधिशाषी अभियंता ने कहा कि ये उनके हांथ में नहीं है कि बिल माफ़ कर दें अलबत्ता यदि ग्रामीण लिखित शिकायत दें तो बात ऊपर तक पहुंचाई जा सकती है.
जल निगम
उधर इस समस्या के बारे में जब जल निगम के जिम्मेदारों से पूछा गया तो अधिशाषी अभियंता यशवीर सिंह(हैण्डपम्प व् बोर तथा रिबोर के कार्य को देखने वाले) ने कहा कि बोर के रिबोर का स्टीमेट अधीक्षण अभियंता बांदा के यहां भेजा जा चुका है जैसे ही बजट स्वीकृत होगा काम चालू हो जाएगा. जल निगम के ही एक अन्य अधिशाषी अभियंता(पेयजल योजना को देखने वाले) जगदीश बाबू ने बताया कि मऊ बरगढ़ पेयजल योजना के तहत जो सप्लाई होनी है उसके लिए विद्युत् फीडर बनना है जिसके लिए विद्युत् विभाग से बात चल रही है. एक डेढ़ महीने में यदि सब ठीक रहा तो फीडर बनकर तैयार हो जाएगा और फिर पानी की सप्लाई शुरू की जाएगी.
Published on:
06 Oct 2018 03:35 pm
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