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हकीकत: खून के आंसू रुला रहा पानी तो लपटों की विनाशलीला से आंखों में आ रहा पानी

आग और पानी की ये खलनायिकी इंसानों और बेजुबानों पर दिन पे दिन भारी पड़ रही है।    

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With Waterscarcity one side

चित्रकूट. बुन्देलखण्ड की तपती हुई धरती पर इस समय आग और पानी की आपसी शत्रुता ग्रामीण इलाकों के बाशिंदों और आशियानों पर भारी पड़ रही है। एक तो भीषण पेयजल संकट ग्रामीणों को खून के आंसू रुला रहा है तो वहीं आए दिन लपटों की विनाशलीला से अग्नि पीडि़तों की आंखों का पानी (आंसू) नहीं सूख रहा। जी हां कुछ ऐसा ही दर्द ऐसी ही तस्वीर हैं बुन्देलखण्ड की। जरा सी चिंगारी विकराल लपटों का रूप अख्तियार करते हुए तबाही मचा देती है तो वहीं बूंद-बूंद पानी को तरसते ग्रामीण सूखे कण्ठ को तर करने के लिए हलकान नजर आते हैं। आग और पानी की ये खलनायिकी इंसानों और बेजुबानों पर दिन पे दिन भारी पड़ रही है।

तपते हुए आसमां से बरसती आग के बीच चिंगारियों से लगती आग पर काबू पाने का प्रयास और बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद करते ग्रामीण, कुछ यही तस्वीर दिखती है भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में। आए दिन लपटों का कहर और पानी की शत्रुता ग्रामीण इलाकों में विपदाओं की झलक कब प्रस्तुत कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता। यूं तो आग और पानी का कोई मेल नहीं लेकिन ग्रामीण इलाकों में इन दोनों के मेल के चलते इलाकाई बाशिंदे एक से जूझने(आग) को विवश हैं तो एक के लिए (पानी) तरसने को।

तराई से लेकर पाठा तक आग कहर पानी की शत्रुता

जनपद के तराई इलाकों से लेकर पाठा के पथरीली क्षेत्रों तक आग का कहर और पानी की शत्रुता जारी है। खेत, खलिहानों, आशियानों पर कब भीषण लपटों की विनाशलीला चालू हो जाए यह निश्चित नहीं और पानी के लिए कब किसका हलक एकदम से सूख जाए यह भी तय नहीं। आग बुझाने के लिए पानी की जद्दोजहद तो कण्ठ तर करने के लिए पानी की जरूरत, खूब तालमेल किया है इन इलाकों में आग और पानी ने।

आए दिन लपटों की विनाशलीला

जनपद के मऊ पहाड़ी, राजापुर, बरगढ़ थाना क्षेत्र आग लगने की घटनाओं के चलते बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह से अभी अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक इन थाना क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक छोटी बड़ी आग लगने की घटनाएं घटित हो चुकी हैं। सैकड़ों किसानों की लाखों की फसलें जलकर राख हो चुकी हैं। पीडि़तों के सामने सिर छिपाने से लेकर रोजी रोटी तक का संकट उठ खड़ा हुआ है। सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब व लघु सीमांत किसानों को हो रही है।

पेयजल संकट के कोड़े की मार

उधर पेयजल संकट ने भी तपती हुई पीठ पर अपने कोड़े की मार से ग्रामीणों को बेहाल कर दिया है। पाठा के पेयजल संकट की हकीकत किसी से छिपी नहीं तो वहीं तराई के इलाकों में पानी की दुश्मनी देखने को मिल रही है। पहाड़ी ब्लाक में पेयजल संकट को लेकर पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई नहीं। पानी के लिए इंसानों और बेजुबानों का संघर्ष जारी है। बहरहाल इसमें कोई संशय नहीं कि आग और पानी के इस खेल और दुश्मनी के मेल ने ग्रामीण इलाकों को हिला कर रख दिया है।