
चित्तौड़गढ़। एक तरफ प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को एआइ की जानकारी दी जा रही है, वहीं प्रदेश के करीब सात हजार सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर लैब ही नहीं है। यही हाल कप्यूटर शिक्षकों का है। प्रदेश के साढ़े उन्नीस हजार माध्यमिक स्कूलों में से साढ़े दस हजार में ही कंप्यूटर अनुदेशकों के पद स्वीकृत हैं। स्वीकृत पदों में भी करीब चार हजार पद रिक्त हैं।
नवीं और दसवीं कक्षा में कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य है। लेकिन अन्य सहायक विषय कला शिक्षा, शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा, समाजोपयोगी उत्पादक कार्य एवं समाज सेवा की तरह इसमें भी खानापूर्ति कर अंक दिए जा रहे हैं। कक्षा 11 एवं 12 के लिए कंप्यूटर का वैकल्पिक विषय के रूप में चयन किया जा सकता है।
सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा में खानापूर्ति का यह खेल करीब 16 साल से जारी है। वर्ष 2008 में सरकार ने केंद्र के सहयोग से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) योजना के तहत स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित की थी। इसमें 75 फीसदी केंद्र का व 25 फीसदी राज्य का सहयोग था।
शुरुआत में संविदा पर कंप्यूटर अनुदेशक लगाए गए। लेकिन, करीब छह साल पहले उन्हें हटा दिया। पिछली सरकार के कार्यकाल में कंप्यूटर अनुदेशकों की भर्ती की गई। लेकिन न तो सभी स्कूलों में पद स्वीकृत किए और न ही स्वीकृत पदों के बराबर भर्ती की गई। ऐसे में प्रदेश की साढ़े उन्नीस हजार स्कूलों में से मात्र 6123 स्कूलों में ही कंप्यूटर अनुदेशक लग पाए।
-प्रदेश में कुल 19 हजार 606 माध्यमिक स्तर के सरकारी विद्यालय हैं।
-प्रदेश में कंप्यूटर अनुदेशकों के 10 हजार 453 पद स्वीकृत हैं।
-प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कुल 6 हजार 123 कंप्यूटर अनुदेशक कार्यरत हैं।
-प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर अनुदेशकों के 4 हजार 330 पद रिक्त हैं।
-प्रदेश के 13 हजार 976 सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब हैं।
-प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों की संख्या 13 हजार 411 है।
Updated on:
14 Feb 2025 12:31 pm
Published on:
14 Feb 2025 12:31 pm
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