17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आग में जिंदा जला प्रौढ़

क्षेत्र के मोकजी का खेड़ा गांव में शनिवार रात आग लगने से एक कच्चे मकान सहित उसमें सोया प्रौढ़ जिंदा जल गया। आग से हजारों रुपए का नुकसान हो गया

2 min read
Google source verification

image

Shankar Sharma

Feb 15, 2016

Chittorgarh photo

Chittorgarh photo

गंगरार.
क्षेत्र के मोकजी का खेड़ा गांव में शनिवार रात आग लगने से एक कच्चे मकान सहित उसमें सोया प्रौढ़ जिंदा जल गया। आग से हजारों रुपए का नुकसान हो गया।


मोकजी का खेड़ा में ज्ञानदास (55) पुत्र मांगीदास रंगास्वामी शनिवार रात केलूपोश कच्चे मकान में सोया हुआ था। ज्ञानदास के परिवार के लोग किसी काम से दूसरे गांव गए हुए थे। देर रात करीब दो बजे कच्चे मकान में आग लग गई, जो कुछ ही देर में काफी भीषण हो गई। आग से केलूपोश छत समेत मकान में रखे घरेलू सामान समेत ज्ञानदास जिंदा जल गया।
आग लगने का पता आस-पड़ोसियों को रविवार सुबह चला। घटना की सूचना मिलने पर सरपंच कय्यूम मंसूरी ने पुलिस एवं प्रशासन को सूचित किया। सूचना पर रविवार सुबह तहसीलदार गोपाल बंजारा, गंगरार थाने से सहायक उप निरीक्षक विजयसिंह, भूरसिंह मौके पर पहुंचे। सरपंच समेत मंसूरी, राजस्व निरीक्षक शम्भूप्रसाद चाष्टा व भाजपा के पूर्व मण्डल महामंत्री राजेन्द्र शर्मा भी मौके पर पहुंचे।

कंकाल बन गई लाश
आग में जिंदा जले ज्ञानदास के शरीर की स्थिति ये हुई कि आग से शरीर कंकाल मेंतब्दील हो गया। ऐसी हालत में मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का मौके पर ही पोस्टमार्टम करवाया। ज्ञानदास का मकान मोकजी का खेड़ा में अन्य मकान से एक तरफ होने के कारण आग का पता रात को नहीं चल पाया।

धुएं व विकलांगता ने ले ली जान
आग लगने के कारण की पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस के अनुसार मृतक ज्ञानदास विकलांग था। सम्भवतया रात को घर में जलाए गए दीपक या चूल्हे की आग ने घर में रखी लकड़ी व घास-फूस को चपेट में ले लिया। इससे वहां रखा खाने-पीने का सामान, ओढऩे-बिछाने व पहनने के कपड़े आदि सभी सामान जल कर राख हो गए। विकलांग होने तथा आग के धुएं के कारण शायद ज्ञानदास घर से बाहर नहीं निकल पाया होगा तथा घर के अंदर ही जलकर राख हो गया। आग की लपटें इतनी तेज थी कि घर के बाहर लगे नीम की डालियां भी इसकी भेंट चढ़ गई। पुलिस के अनुसार ज्ञानदास एवं उसकी पत्नी भिक्षावृत्ति करते हैं तथा पुत्र किसी होटल पर काम करते हैं। पुत्रियों की शादी हो जाने से वे ससुराल में रह रही हैं।

गए थे जिंदा छोड़कर लौटे तो मिली हड्डियां
रविवार सुबह जब उसके पुत्र एवं पत्नी काम पर से लौटे तो घर को जला हुआ देख सकते में आ गए तथा दहाड़ें मारकर रोने लगे। पुत्रों ने अपने पिता को नहीं देखा तो वे उसको आवाज देने लगे। इस दौरान वहां बस्ती के भी बहुत सारे लोग आ गए। इन लोगों ने ज्ञानदास की तलाश शुरू की। जले हुए मकान के अन्दर जाकर देखा तो ज्ञानदास की हड्डियां पड़ी हुई मिली। परिजनों को क्या मालूम था कि जिन्हें वे जिंदा छोड़ गए थे, वापस उनका मुंह तक भी नहीं देख पाएंगे।

मुआवजे के लिए लिखा जाएगा पत्र
तहसीलदार गोपाल बंजारा ने बताया कि ज्ञानदास रंगास्वामी का मकान एवं सामान जलने के मामले में जांच कर नुकसान का आंकलन किया गया है। इसमें करीब डेढ़ लाख रुपए की क्षति होना माना गया है। जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन के पास प्रस्तुत कर मुआवजा राशि दिलाए जाने के लिए अनुरोध किया जाएगा।

एक सप्ताह में हुई दूसरी घटना
आग में जिंदा जल जाने की इस तरह की घटना जिले में एक सप्ताह में ये दूसरी घटना है। सप्ताह भर पहले बेगूं क्षेत्र के आंवलहेड़ा में भी बाड़े में लगी आग को बुझाने व वहां बंधी भैंस को बाहर निकालने के प्रयास में रतनलाल भील की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। इसके बाद गंगरार क्षेत्र के मोकजी का खेड़ा में यह दूसरी घटना हो गई।