चित्तौडग़ढ़
महिला एवं बाल चिकित्सालय की नवजात शिशु इकाई (एसएनसीयू) की प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अपनी अलग ही पहचान है। इस यूनिट में अब पीलिया से ग्रस्त दो दिन के नवजात के शरीर का पूरा रक्त बदलकर चिकित्सा टीम ने नई उपलब्धि हासिल की है। चित्तौडग़ढ़ में ऐसा पहली बार हुआ है।
एसएनसीयू प्रभारी डॉ. जय सिंह मीणा ने बताया कि बेगूं ब्लॉक के चेची गांव की सन्नू पत्नी अशोक कंजर ने 24 मई को सुबह कन्या को जन्म दिया था। जन्म के 24 घण्टे के अन्दर ही बच्ची पीलिया से ग्रसित हो गई। उसका पीलिया का स्तर बिलिरूबिन 22 मिग्रा डेसीलीटर तक पहुंच गया। गुरूवार को इस नवजात को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। शाम तक स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर शिशु के शरीर का पूरा रक्त बदलने का निर्णय किया गया। डॉ. मीणा ने बताया कि मां का रक्त ओ-नेगेटिव व नवजात का ओ- पॉजिटिव होने से पीलिया का स्तर बढ़ रहा था। शुक्रवार को सुबह नवजात के रक्त की जांच में बिलिरूबिन का स्तर 27 मिग्रा/डेसीलीटर तक पहुंच गया था। चिकित्सा टीम ने नवजात के शरीर का रक्त बदलने की प्रक्रिया शुरू की। शिशु को झटके भी आने लगे और दो -तीन बार श्वसन प्रणाली भी बाधित हुई, लेकिन टीन सदस्यों ने तत्परता से इस पर नियंत्रण कर लिया। डॉ. मीणा ने बताया कि पीलिया का स्तर बढने से नवजात के दिमाग के ब्लड ब्रेन बेरियर को लांघ कर दिमाग की झिल्लियों में जम सकता था। उन्होंने बताया कि शिशु के शरीर के संपूर्ण रक्त को बदलने की प्रकिया को ब्लड एक्सचेन्ज ट्रॉन्सफ्यूजन कहते है, जो अक्सर मेडिकल कॉलोजों में ही होता है। यह प्रक्रिया चित्तौड़ में पहले कभी नहीं की गई थी। शिशु का ब्लड एक्सचेन्ज ट्रॉन्सफ्यूजन एसएनसीयू में ही करने का निर्णय लिया गया। जिसके लिए शिशु के माता पिता की अनुमति ली गई। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अनिल सैनी का भी पूरा सहयोग रहा। ब्लड एक्सचेन्ज की प्रक्रिया शुक्रवार को सुबह 10 बजे प्रारम्भ की गई, जो 11.30 बजे पूर्ण हुई। 1900 ग्राम के नवजात के शरीर में कुल 350 एमएल. रक्त चढाया गया और इतना ही बाहर निकाला गया।
इस प्रक्रिया के बाद शिशु के पीलिया के स्तर को काफ ी गिरावट आई है। नवजात ने मां का दूध भी पीना प्रारम्भ कर दिया है। इस प्रक्रिया में एसएनसीयू प्रभारी डॉ. जय सिंह के निर्देशन में मनीष तिवारी, मनीष भट्ट, अंकित पारीक, लोकेश धाकड़, रेखा जाट एवं निर्मला टांक का सहयोग रहा।